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मेरा रंग फाउंडेशन के दस साल पूरे, महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ने वाली ज्योति गोयल को ‘रंग साहस’ सम्मान

महिलाओं को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और घरेलू हिंसा व लैंगिक भेदभाव के खिलाफ लगातार काम करने वाली अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति गोयल को मेरा रंग फाउंडेशन के ‘रंग साहस का’ सम्मान दिया गया। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में फाउंडेशन के दसवें वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिंदी के कवि-कथाकार अरुण आदित्य ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। ज्योति गोयल पिछले एक दशक से अधिक समय से महिला अधिकार, कानूनी सहायता, जेंडर जस्टिस और जमीनी स्तर पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हैं। मेरा रंग फाउंडेशन के दस वर्ष पूरे होने पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘बदलाव की आहट : नई पीढ़ी, नए सवाल’ में युवा, राजनीति, मीडिया, अभिव्यक्ति और स्त्रियों की सार्वजनिक भागीदारी से जुड़े ऐसे कई सवाल चर्चा के केंद्र में रहे। चर्चा में न्यूजलॉन्ड्री हिंदी के मैनेजिंग एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार अतुल चौरसिया, स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह, लोक गायिका और राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य के लिए चर्चित नेहा सिंह राठौर, समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव, राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अतुल चौरसिया ने किया। बातचीत की शुरुआत करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि नई पीढ़ी राजनीति, मीडिया, समाज और रचनात्मक दुनिया में किस तरह बदलाव ला रही है और इन बदलावों से भविष्य की क्या दिशा बन रही है। राजनीतिक दलों से जुड़े युवा वक्ताओं से उन्होंने यह सवाल भी किया कि आखिर क्या वजह है कि राजनीतिक पार्टियां बड़ी संख्या में युवाओं को अपने साथ जोड़ पाने में मुश्किल महसूस कर रही हैं। 

‘जेन-जी की तस्वीर को महानगरों से बाहर भी देखिए’
नेहा सिंह ने जेन-जी की प्रचलित छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई पीढ़ी का अर्थ केवल वह युवा नहीं है जो ढीले-ढाले कपड़े पहनता है, संगीत सुनता है और बहुत ‘कूल’ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस परिभाषा में उन युवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए जो छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं और अपनी आजीविका के लिए अलग-अलग तरह के काम करते हुए संघर्ष कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को चुप कराने का सबसे आसान तरीका उनके चरित्र पर सवाल खड़ा करना बना दिया गया है। राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं को असहमति या वैचारिक आलोचना से अधिक कई बार व्यक्तिगत और चरित्र से जुड़े हमलों का सामना करना पड़ता है। लोक गायिका नेहा ने भी इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि हमारे समाज की संरचना ऐसी है कि वह मुखर स्त्री को आसानी से स्वीकार नहीं करती। उन्होंने स्त्रियों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्ता तथा समाज से सवाल पूछने के रास्ते में आने वाली चुनौतियों पर अपनी बात रखी। आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया और राजनीतिक जीवन में मिलने वाली ट्रोलिंग और अपशब्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “अगर आपको गालियां पड़ रही हैं, इसका मतलब है कि आप सही कर रहे हैं। जिस दिन गालियां पड़नी बंद हो जाएंगी, हम समझेंगे कि शायद हमारी धार कमजोर पड़ रही है।”  उन्होंने कहा कि उनके लिए अपमानजनक संबोधनों से डरने के बजाय उन्हें अपने ढंग से परिभाषित करना प्रतिरोध का एक तरीका है। प्रियंका ने कहा कि अगर उन्हें ‘शूर्पणखा’ कहा जाता है तो वे उसे ऐसी साहसी स्त्री के प्रतीक के रूप में देखती हैं जो अपनी इच्छाओं और सेक्सुअलिटी को स्वीकार करती है। इसी तरह अगर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नाम को जोड़कर उन्हें अपशब्द कहे जाते हैं तो वे आंबेडकर की वैचारिक विरासत को गर्व के साथ स्वीकार करती हैं।

युवा अभिव्यक्ति के लिए जगह तलाश रहा है

स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने कहा कि आज का युवा अपनी अभिव्यक्ति के लिए अपना स्पेस तलाश रहा है और आंदोलनों को भी इसके एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। चर्चा में डिजिटल माध्यमों के उभार, परंपरागत मीडिया से अलग स्वतंत्र अभिव्यक्ति के नए मंचों और युवा पीढ़ी के सामाजिक-राजनीतिक सवालों पर भी बातचीत हुई। वरिष्ठ पत्रकार अतुल चौरसिया ने अलग-अलग वक्ताओं के अनुभवों को जोड़ते हुए युवा पीढ़ी और राजनीतिक दलों के रिश्ते, मीडिया के बदलते स्वरूप और सार्वजनिक विमर्श में युवाओं की भागीदारी से जुड़े सवाल सामने रखे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने राजनीति और युवा भागीदारी से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी। पत्रकारिता और लेखन की पृष्ठभूमि से सक्रिय राजनीति में आए आलम ने लोकतंत्र, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक दलों में नई पीढ़ी की भूमिका के संदर्भ में चर्चा में हिस्सा लिया।

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