एसटीटी बढ़ने के बाद भी डेरिवेटिव पर कोई नया नियम नहीं, सेबी चेयरमैन ने अटकलों को किया खारिज

केंद्रीय बजट 2026 में डेरिवेटिव लेनदेन पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद, बाजार में आगे सख्ती की अटकलें तेज हो गई थीं। इन अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि नियामक फिलहाल डेरिवेटिव बाजार में किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप पर विचार नहीं कर रहा है। हालिया प्रश्नोत्तर सत्र में सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक डेरिवेटिव बाजारों का विश्लेषण पूरी तरह डेटा-संचालित और व्यवस्थित तरीके से करता है। उन्होंने जोर दिया कि हम किसी नए उपाय पर विचार नहीं कर रहे हैं। जो नियामक ढांचा मौजूद है, वही जारी रहेगा। इसके साथ ही पांडे ने साप्ताहिक एक्सपायरी अनुबंधों को समाप्त करने की अफवाहों को भी खारिज कर दिया और कहा कि अभी तक ऐसे किसी बदलाव पर चर्चा नहीं हुई है।
म्यूनिसिपल बॉन्ड्स पर संभावनाएं
म्यूनिसिपल बॉन्ड्स को लेकर सेबी प्रमुख ने कहा कि इस क्षेत्र में भी जागरूकता की कमी है। फिलहाल नगरपालिकाओं द्वारा जारी बॉन्ड्स की संख्या बेहद सीमित है अब तक केवल 12 निर्गम हुए हैं। हालांकि, बजट घोषणाओं के मुताबिक सरकार नगरपालिकाओं को ऐसे बॉन्ड जारी करने में समर्थन देगी। पांडे ने कहा कि भले ही यह बाजार अभी शुरुआती और लगभग नगण्य स्तर पर है, लेकिन इसमें भविष्य में बड़ी संभावनाएं हैं और इसके लिए नियामक ढांचा तेजी से विकसित हो रहा है।



