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डेड लेटर बॉक्स के जरिए सोनीपत से अमृतसर और फिर मुंबई पहुंचे हथियार, जांच में बड़ा खुलासा

अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में एक नया अपडेट सामने आया है। दरअसल, इस वारदात को अंजाम देने के लिए जिस पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था, उसे सप्लाई करने वाले नेटवर्क से जुड़ी नई जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पंजाब के अमृतसर में पहले से तय एक जगह से हथियार उठाए थे। इसके लिए ‘डेड लेटर बॉक्स’ नाम के तरीके का इस्तेमाल किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, दो आरोपी कुणाल और सुमित करीब दो हफ्ते पहले हथियार लेने अमृतसर गए थे। उन्हें हथियार रखे होने की जगह के बारे में अनिल पंडित ने पहले ही बता दिया था। अनिल पंडित एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए कुणाल के संपर्क में था।
क्या है डेड लेटर बॉक्स का तरीका?
डेड लेटर बॉक्स एक ऐसा तरीका है, जिसमें किसी सामान को पहले से तय जगह पर रख दिया जाता है। इसके बाद दूसरा व्यक्ति वहां पहुंचकर सामान उठा लेता है। इस दौरान सामान रखने और लेने वाले लोगों को एक-दूसरे से मिलने की जरूरत नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक, कुणाल और सुमित को भी यह नहीं पता था कि अमृतसर में हथियार किसने रखे थे। सूत्रों ने बताया कि अनिल पंडित ने इस काम के लिए आरोपियों को करीब 70 से 80 हजार रुपए दिए थे। इनमें से करीब 10 से 12 हजार रुपए दो महिलाओं बबीता और राधा को दिए गए थे। इन दोनों महिलाओं को हथियार मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

जुलाई में जेल से बाहर आया था कुणाल
कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से रिहा हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद उसके एक दोस्त ने उसकी मुलाकात अनिल पंडित से कराई थी। इसके बाद दोनों एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत करने लगे थे। करीब दो हफ्ते पहले अनिल पंडित ने कुणाल को अमृतसर से हथियार लेने और उन्हें मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। जांचकर्ताओं को शक है कि कुणाल ने हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड राधा की मदद ली थी। राधा और बबीता सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुणाल की मुलाकात राधा से करीब दो महीने पहले हुई थी। कुणाल के कहने पर ही राधा, बबीता के साथ मुंबई गई थी।



