यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बार फिर दुनिया के देशों से रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की है। उनका कहना है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति वार्ता की मेज तक लाने के लिए और कड़े प्रतिबंध तथा अंतरराष्ट्रीय दबाव की जरूरत है। रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और जेलेंस्की लगातार युद्ध समाप्त करने के लिए नए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि आने वाले छह महीनों में अगर यूक्रेन युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करता है, तो भविष्य की किसी भी शांति वार्ता में उसकी स्थिति काफी मजबूत हो सकती है। उन्होंने कहा कि सर्दियों के आने से पहले किसी न किसी तरह कूटनीतिक रास्ता निकालकर बातचीत शुरू करनी होगी। उनका मानना है कि युद्ध को केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि बातचीत के जरिए भी खत्म किया जा सकता है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (आईएसडब्ल्यू) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के मोर्चे पर हालात धीरे-धीरे यूक्रेन के पक्ष में बदलते दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार रूसी सेना की बढ़त की गति धीमी पड़ रही है, जबकि यूक्रेनी सेना नई रणनीतियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूक्रेन पूरी तरह से युद्ध का रुख बदल पाएगा या नहीं।
जेलेंस्की ने अमेरिका से अतिरिक्त सैन्य सहायता की भी मांग की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी कांग्रेस को पत्र भेजकर पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए और इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। यह मांग उस समय की गई जब रूस ने हाल ही में कीव पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। यूक्रेन का कहना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता उसकी जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है और पैट्रियट मिसाइलों की आपूर्ति बढ़ाई जानी चाहिए। अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि हथियार और मिसाइल बनाने वाली कंपनियों को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि यूक्रेन और उसके सहयोगियों की जरूरतें पूरी की जा सकें। हेगसेथ ने यह भी कहा कि यूरोपीय देशों ने भी यूक्रेन की मदद के लिए काफी संसाधन उपलब्ध कराए हैं और अमेरिका इस सहयोग का स्वागत करता है। आईएसडब्ल्यू ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के पास वर्तमान परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए सीमित समय है। संस्था का मानना है कि रूस इस समय युद्धक्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और यदि पश्चिमी देश अपनी सहायता बढ़ाते हैं तो यूक्रेन को महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ मिल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस पर बढ़ता सैन्य और आर्थिक दबाव पुतिन को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।
कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्वीकार किया कि फिलहाल शांति वार्ता की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि बातचीत के लिए कोई नया अवसर पैदा होता है तो अमेरिका फिर से सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार रहेगा। जेलेंस्की ने विश्वास जताया कि रूस अंततः किसी न किसी समझौते के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि अतीत में अमेरिका की भागीदारी के साथ हुई बातचीत भविष्य की वार्ताओं का आधार बन सकती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अमेरिकी अधिकारियों मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को कीव आने का निमंत्रण भी दिया है। उनका कहना है कि अमेरिकी प्रतिनिधियों को यूक्रेन आकर खुद हालात देखने चाहिए ताकि वे युद्ध की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकें। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस तरह की यात्रा पर चर्चा हुई है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। जेलेंस्की का मानना है कि शांति वार्ता में केवल अमेरिका या केवल यूरोप की भूमिका पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सबसे प्रभावी बातचीत वही होगी जिसमें यूक्रेन, रूस, अमेरिका और यूरोपीय देश सभी शामिल हों। उनके अनुसार, यही ऐसा मंच होगा जो स्थायी शांति का रास्ता तैयार कर सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि पुतिन बातचीत के लिए तैयार हों तो वह उनसे सीधे मिलने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके लिए रूस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना जरूरी है। जेलेंस्की के मुताबिक अतिरिक्त प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दबाव रूस को बातचीत के लिए मजबूर कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि रूसी सेना को हर महीने लगभग 35 हजार सैनिकों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे देश के भीतर भी दबाव बढ़ रहा है। रूस पर 2022 से कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, लेकिन ऊंची वैश्विक तेल कीमतों और कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह झटका नहीं लगा। इसके बावजूद जेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका भविष्य में और सख्त आर्थिक कदम उठाएगा।
सैन्य तकनीक के क्षेत्र में भी यूक्रेन नए समझौतों की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने बताया कि उनके देश ने कुछ मध्य-पूर्वी और यूरोपीय देशों के साथ ड्रोन संबंधी समझौते किए हैं और अब यूरोपीय संघ के साथ एक बड़े ड्रोन समझौते पर काम चल रहा है। उन्होंने अमेरिका के साथ भी इसी तरह की साझेदारी की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि अमेरिकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक और यूक्रेन के युद्ध अनुभव को मिलाकर दुनिया की सबसे शक्तिशाली रक्षा तकनीक विकसित की जा सकती है। अपने बयान के आखिरी में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को अमेरिका के समर्थन की जरूरत है और वह उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेंगे। उनके अनुसार, युद्ध समाप्त करने के लिए सैन्य सहायता, कड़े प्रतिबंध और प्रभावी कूटनीतिक प्रयासों का एक साथ आगे बढ़ना जरूरी है।