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ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान!

भारत के हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम में बड़ी प्रगति सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के समीर वी कामत ने गुरुवार को बताया कि भारत का लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम अब उन्नत चरण में पहुंच चुका है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द किए जा सकते हैं। उन्होंने यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0 के दौरान दी, जहां उन्होंने देश की अगली पीढ़ी की स्ट्राइक क्षमताओं पर विस्तार से बात की। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी का पालन करता है, यानी यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधी नहीं जाती, बल्कि बीच-बीच में दिशा बदलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है। अंतिम चरण में यह अपने स्वदेशी सेंसरों की मदद से मूविंग टारगेट को भी सटीकता से हिट कर सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, बहुत तेज गति से चलती है और लगातार दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन के ग्राउंड और समुद्री रडार के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इस मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। पहले चरण के खत्म होते ही वह अलग हो जाता है, जबकि दूसरा चरण मिसाइल को हाइपरसोनिक गति तक पहुंचाता है। इसके बाद मिसाइल बिना इंजन के ग्लाइड फेज में प्रवेश करती है और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले कई रणनीतिक मूवमेंट करती है। कामत ने हाइपरसोनिक ग्लाइड और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उनके मुताबिक, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है, जो पूरी उड़ान के दौरान उसे शक्ति देता है। वहीं, हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को शुरुआती गति देने के लिए बूस्टर का इस्तेमाल होता है, जिसके बाद यह बिना इंजन के ग्लाइड करती है। उन्होंने बताया कि ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम क्रूज मिसाइल की तुलना में अधिक आगे है और इसका पहला परीक्षण जल्द हो सकता है। सामान्य तौर पर हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक यानी करीब 6100 किमी/घंटा से ज्यादा रफ्तार से उड़ान भरती हैं। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती हैं, जो सुपरसोनिक दहन के जरिए लंबे समय तक अत्यधिक गति बनाए रखने में सक्षम होता है।

भारत कन्वेंशनल मिसाइल फोर्स की संरचना पर कर रहा काम

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत एक कन्वेंशनल मिसाइल फोर्स की संरचना पर काम कर रहा है, हालांकि इसका अंतिम ढांचा अभी तय नहीं हुआ है। उनके अनुसार, इस फोर्स में अलग-अलग रेंज और रणनीतिक जरूरतों के लिए विविध प्रकार की मिसाइलें शामिल होंगी। इसमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और करीब 2000 किलोमीटर तक की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों का भी समावेश होगा, ताकि विभिन्न परिस्थितियों में सटीक हमले की क्षमता सुनिश्चित की जा सके। मौजूदा तैयारियों पर बात करते हुए कामत ने कहा कि शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय मिसाइल अब परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ मौजूदा रणनीतिक मिसाइलों को भी मीडियम और लंबी दूरी के टैक्टिकल उपयोग के लिए बदला जा सकता है।

भारत ने हाल के वर्षों में हासिल की कई उपलब्धियां

भारत ने हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। नवंबर 2024 में डीआरडीओ ने ने ओडिशा तट से दूर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। मिसाइल ने 1500 किलोमीटर से अधिक की रेंज के साथ सटीक टर्मिनल मैन्युवर का प्रदर्शन किया। इससे पहले 2020 में हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण कर स्क्रैमजेट तकनीक और स्थायी हाइपरसोनिक उड़ान को प्रमाणित किया गया था। इसी साल जनवरी में डीआरडीओ ने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर का 12 मिनट से अधिक समय तक ग्राउंड टेस्ट किया, जिससे हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के लिए जरूरी तकनीकों को मान्यता मिली। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था और कहा था कि इससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत तकनीक मौजूद है।

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