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‘जरूरत पड़ी तो पांच साल तक तक लड़ने को तैयार’, भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि का बड़ा बयान

भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने को ईरान की मजबूरी बताया। उन्होंने कहा, ईरान ने आत्मरक्षा के उपायों के तहत यह कदम उठाया, ताकि अमेरिका समर्थित ठिकानों से हमलों को रोका जा सके। इलाही ने कहा कि ईरान ने भले ही युद्ध शुरू नहीं किया, पर अपनी गरिमा और भूमि के लिए सबकुछ कुर्बान कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का सवाल ही नहीं है। जरूरत पड़ी तो ईरान पांच साल तक जंग लड़ने को भी तैयार है।

तेहरान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी सैन्य ठिकाने
इलाही ने कहा कि खाड़ी देशों में अमेरिका समर्थित ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ किया जा रहा था। अमेरिका ने ईरान के आसपास 33 से 45 सैन्य अड्डे बना रखे हैं। तेहरान ने पड़ोसियों से अनुरोध किया था कि वे अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए इनका इस्तेमाल न होने दें, लेकिन हमले जारी रहे। इलाही ने ट्रंप के इस दावे को पूरी तरह नकार दिया कि संघर्ष बढ़ने के बीच ईरान ने वाशिंगटन के साथ वार्ता करने को तैयार होने की बात कही हैं। उन्होंने दो टूक कहा, इसका सवाल ही नहीं उठता। हम अपना खून बहाने को तैयार हैं लेकिन उन्हें अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। ईरान इस समय अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता क्योंकि उसने ही यह युद्ध शुरू किया है। और हमें उनके साथ अनुभव है। दो बार हम उनके साथ बातचीत कर रहे थे, और उन्होंने हम पर हमला किया। उन्होंने हमें निशाना बनाया। इलाही ने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के कारण ऊर्जा संकट उत्पन्न होने से लोगों को गैस, पेट्रोल, तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि लोगों को पीड़ा हो रही है और इस स्थिति से कोई खुशी नहीं हो रही। लेकिन हमें अपनी रक्षा करनी होगी। हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने वैश्विक नेताओं से अमेरिका पर युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया।

भारत से गहरे संबंध चाहते थे अयातुल्ला
इलाही ने कहा कि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भारत से गहरे संबंध चाहते थे और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते थे। भारत में दिए साक्षात्कार में इलाही ने कहा कि अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली किताब भारत पर लिखी थी, जिससे उनके भारत के प्रति लगाव का पता चलता है। वे भारतीयों की ईमानदारी, वफादारी और बुद्धिमत्ता की सराहना करते थे। ईरान भारत के साथ अपने संबंधों में किसी तरह का टकराव या समस्या नहीं चाहता और दोनों देशों की दोस्ती आगे भी मजबूत बनी रहेगी। इलाही ने बताया कि तनाव के बावजूद अयातुल्ला ने अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान या बंकर में जाने से इन्कार कर दिया था। उनके सहयोगियों और सुरक्षा अधिकारियों की सलाह को स्वीकार नहीं किया। खामनेई का मानना था कि यदि तेहरान के करीब 1.9 करोड़ नागरिकों के लिए सुरक्षित शेल्टर उपलब्ध कराए जाएं, तभी वह भी अपना घर छोड़ने के लिए तैयार होंगे।

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