नए रुख से टैरिफ विवाद खत्म होने के संकेत,अब संपूर्ण कृषि-डेयरी क्षेत्र खोलने की मांग नहीं कर रहा अमेरिका

अमेरिका अब भारत का पूरा कृषि और डेयरी क्षेत्र नहीं अपने उत्पादों के लिए नहीं चाहता। उसकी जगह इन दोनों क्षेत्रों में बस अपना मक्का और सभ्रांत वर्ग के इस्तेमाल वाला डेयरी उत्पाद चीज भारत को बेचना चाहता है। व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका ने अब पूरे कृषि और डेयरी क्षेत्र में प्रवेश की जगह नया और व्यावहारिक रुख अपनाया है। मंगलवार को दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच हुई बैठक में व्यापार वार्ता के छठे चरण की शुरुआत की उम्मीद बंधी है। सरकारी सूत्र लंबे तनाव और तनातनी के बीच अमेरिका और भारत के वार्ताकार ब्रेंडन लिंच और राजेश अग्रवाल के बीच हुई बातचीत को सकारात्मक मान रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि टैरिफ विवाद सुलझाने के लिए दोनों देश निकट भविष्य में नए रोडमैप के साथ आगे बढ़ेंगे। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि व्यापार वार्ता के लिए तैयार भारत को अच्छे परिणाम की उम्मीद है। बातचीत में हमारा दृष्टिकोण भारत के हित की रक्षा है। उन्होंने कहा कि बातचीत के परिणामों पर अटकलें लगाने की जरूरत नहीं है। इससे पहले भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर अमेरिका के लिए कृषि और डेयरी क्षेत्र को नहीं खोलेगा। भारतीय आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने से पहले अमेरिका चाहता था कि भारत उसके लिए कृषि और डेयरी क्षेत्र खोले। हालांकि भारत के इन्कार और इस टैरिफ जंग से होने वाले नुकसान के बाद अमेरिका के रुख में बड़ा परिवर्तन आया है। अमेरिका अब चाहता है कि भारत अपने उच्च वर्ग में इस्तेमाल होने वाली आयातित चीज के लिए अपना बाजार खोले। इसके अलावा अमेरिका की इच्छा है कि भारत उससे मक्का आयात करे।



