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वरिष्ठ आईएएस राजगोपाल देवरा बने महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल सदस्य

सीताराम मेवाती

महाराष्ट्र राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजगोपाल देवरा को महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल, मुंबई में सदस्य (तकनीकी/प्रशासनिक) के रूप में नियुक्त किया है। गृह निर्माण विभाग विभाग द्वारा की गई इस नियुक्ति में देवरा ने सोमवार को पद की शपथ ग्रहण की।

शपथ ग्रहण समारोह में ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति एस. एस. शिंदे ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर माननीय सदस्य न्यायमूर्ति श्रीराम जगताप और श्रीकांत देशपांडे, आईएएस भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य व्यक्तियों, सहकर्मियों और शुभचिंतक उपस्थित रहे l

शपथ ग्रहण के बाद देवरा ने मुंबई तरंग से बातचीत में कहा, “यह मेरे लिए अर्ध-न्यायिक भूमिका में सेवा देने का बड़ा अवसर है। मुझे न्यायिक प्रक्रिया और न्यायालयीन कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा। प्रतिष्ठित न्यायिक परिवार का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान की बात है।”

उन्होंने भारत की रियल एस्टेट नियामक व्यवस्था को एक बड़ा सुधार बताते हुए कहा, “सशक्त निगरानी और न्यायिक तंत्र की स्थापना ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता और जवाबदेही सुनिश्चित की है। अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में मेरा दायित्व घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना और क्षेत्र के विकास में योगदान देना होगा।” देवरा ने यह भी कहा कि रियल एस्टेट महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है और वह 2047 तक ‘विकसित महाराष्ट्र’ के विजन को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

राजगोपाल देवरा: अनुभव और पहल

1992 बैच के आईएएस अधिकारी देवरा ने तीन दशकों में अहमदनगर और कोल्हापुर के कलेक्टर, अमरावती के संभागीय आयुक्त और विभिन्न विभागों में सचिव के रूप में सेवाएं दी हैं। उन्होंने आदिवासी विकास, चिकित्सा शिक्षा और सहकारिता विभागों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे प्रोटोकॉल और वित्तीय सुधार विभाग के प्रधान सचिव भी रहे हैं। वर्तमान में वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (योजना, राजस्व, निबंधन व मुद्रांक तथा आबकारी) के पद पर कार्यरत हैं। देवरा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है और नीति निर्माण, शिक्षा, वित्त, आदिवासी कल्याण व सहकारी सुधारों पर शोध-पत्र लिखे हैं। मुख्यमंत्री फेलोशिप प्रोग्राम जैसी कई महत्त्वपूर्ण पहलों का श्रेय भी उन्हें जाता है।

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