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हर चीज पाना जरूरी नहीं, कभी-कभी खोकर भी मिलती है सच्ची खुशी; त्याग में छिपा है जीवन का असली संतोष

कभी-कभी हम किसी कार्यक्रम या सोशल मीडिया ट्रेंड्स में शामिल होने की दौड़ में इतने उलझ जाते हैं कि तनाव महसूस होने लगता है। अगर हमें कुछ समय के लिए इस दौड़ से दूर रहने का मौका मिले, तो उसमें और सुख महसूस होगा, वह जोमो (कुछ छूट जाने का आनंद) कहलाता है। इसमें खुशी चीजों में शामिल होने से नहीं, बल्कि उनकी अनुपस्थिति में अपने समय का आनंद लेने से मिलती है। ठीक इसके विपरित फोमो (कुछ छूट जाने का डर) है, जिसमें दूसरों की जिंदगी देखकर यह डर पैदा होता है कि हम पीछे रह गए हैं। यह डर सिर्फ सोशल मीडिया की वजह से नहीं, बल्कि खुद की तुलना दूसरों से करने से आता है। तुलना तनाव बढ़ाती है, जबकि जो है उसे स्वीकार करने से तुलना घटती है और जोमो बढ़ता है, जिससे जीवन संतुलित होता है।

डर से छुटकारा पाएं

फोमो से बचने के लिए सबसे पहले सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित करना जरूरी है, क्योंकि लगातार स्क्रीन पर दूसरों की जिंदगी देखने से तुलना और बेचैनी बढ़ती है। इसके लिए डिजिटल डिटॉक्स लेना, कुछ एप्स हटाना या स्क्रीन टाइम मैनेज करने वाले टूल्स का उपयोग करना मददगार हो सकता है। साथ ही आत्म-चिंतन करें और खुद से पूछें कि हर जगह शामिल होने की इच्छा क्यों होती है। अक्सर यह असुरक्षा या पीछे रह जाने के डर से पैदा होती है। इसके अलावा परफेक्शनिज्म को चुनौती देना भी जरूरी है, यानी यह स्वीकार करना कि सब कुछ करना न तो संभव है और न ही जरूरी। हर चीज में शामिल न होकर आप अपना समय, ऊर्जा और मानसिक शांति बचा सकते हैं, जो स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।

कृतज्ञता का अभ्यास करें

खुश और संतुलित रहने के लिए कृतज्ञता का अभ्यास करना बहुत जरूरी है, यानी जो आपके पास है उसी पर ध्यान देना और उसकी कद्र करना, न कि उन चीजों पर दुखी होना, जो आपके पास नहीं हैं। इसके लिए रोजाना अपनी छोटी-छोटी खुशियों को डायरी में लिखना मददगार हो सकता है। साथ ही ‘ना’ कहना सीखें और ऐसे काम स्वीकार न करें, जो आपके मूल्यों से मेल न खाते हों या आपको बेवजह बहुत व्यस्त कर दें, ताकि आपके पास अपने लिए समय न बचे। इसके अलावा वर्तमान में जीना सीखें, ध्यान करें या कुछ समय के लिए मोबाइल से दूर रहकर अपनी पसंद की गतिविधियों में पूरी तरह मन लगाएं, इससे मन शांत रहता है।

समय का महत्व समझें
अपने समय का महत्व समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि समय एक बार चला जाए, तो वापस नहीं आता। इसलिए इसे बेकार की स्क्रॉलिंग के बजाय पढ़ने, अपने शौक पूरे करने या वास्तविक जीवन में लोगों से जुड़ने जैसी अर्थपूर्ण गतिविधियों में लगाना बेहतर होता है। डिजिटल बातचीत की तुलना में आमने-सामने मिलना ज्यादा गहरा और सुकून देने वाला होता है, क्योंकि इससे रिश्ते मजबूत होते हैं और अकेलापन कम होता है। साथ ही, आत्म-सम्मान बढ़ाने के लिए ऐसे काम करें, जो आपको खुद पर गर्व महसूस कराएं, जैसे कोई नया कौशल सीखना या अपनी क्षमता को निखारना।

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