भारत ने श्रीलंका को 10 बेली ब्रिज सौंपे, चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा सहारा

श्रीनिवास अय्यर
भारत ने चक्रवात ‘दितवाह’ से प्रभावित श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों को मजबूती देते हुए 10 बेली ब्रिज की एक बड़ी खेप श्रीलंका को सौंपी है। ये बेली ब्रिज विशाखापट्टनम से भारतीय नौसेना के जहाज INS घड़ियाल के माध्यम से कोलंबो पहुंचे। 5 फरवरी 2026 को आयोजित एक औपचारिक समारोह में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त डॉ. सत्यांजल पांडे ने इन्हें श्रीलंका के बंदरगाह एवं नागरिक उड्डयन के उप मंत्री जनिथा रुवान कोडितुवक्कु को सौंपा।
ये अतिरिक्त बेली ब्रिज श्रीलंका को दी जा रही भारत की 50 लाख अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता का हिस्सा हैं, जो चक्रवात के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य प्रभावित इलाकों में आवागमन और संपर्क व्यवस्था को शीघ्र बहाल करना है। अधिकारियों के अनुसार, इस सहायता चरण के अंतर्गत शेष ब्रिज सामग्री की एक और खेप भी जल्द ही श्रीलंका पहुंचेगी।
बेली ब्रिज की यह आपूर्ति भारत द्वारा घोषित 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के व्यापक पुनर्निर्माण और पुनर्वास पैकेज का अहम हिस्सा है। इस पैकेज की घोषणा भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने चक्रवात दितवाह के बाद श्रीलंका यात्रा के दौरान की थी। यह सहायता श्रीलंका के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और पड़ोसी देश के साथ मजबूत साझेदारी को दर्शाती है।
नए बेली ब्रिज श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में स्थापित किए जाएंगे। इनके स्थान चयन और तकनीकी मूल्यांकन का कार्य भारतीय सेना के इंजीनियर, श्रीलंकाई सेना और रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) के साथ समन्वय में कर रहे हैं, ताकि स्थापना प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सके।
गौरतलब है कि इससे पहले भी भारत ने श्रीलंका को चार बेली ब्रिज उपलब्ध कराए थे, जिनमें से दो किलिनोच्ची जिले में और दो कैंडी–रागाला मार्ग पर लगाए गए थे। इन पुलों ने पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में संपर्क बहाल करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे स्थानीय लोगों को आवश्यक सेवाओं, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने में मदद मिली।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह श्रीलंका की पुनर्बहाली, मजबूती और दीर्घकालिक कनेक्टिविटी के लिए समयबद्ध, लक्षित और जन-केंद्रित सहायता प्रदान करता रहेगा।



