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‘बिना पसंदीदा अपशब्दों का प्रयोग किए 90 मिनट तक दिया भाषण’, कांग्रेस का गृहमंत्री अमित शाह पर तंज

कांग्रेस ने मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधता। कांग्रेस ने कहा  उन्होंने लोकसभा में एक चमत्कार कर दिखाया। उन्होंने 90 मिनट तक बिना एक बार भी अपने पसंदीदा अपशब्द का इस्तेमाल किए उग्र भाषण दिया। विपक्षी दल का यह कटाक्ष गृह मंत्री अमित शाह की उस घोषणा के एक दिन बाद आया है। इसमें उन्होंने कहा था कि माओवादियों के सर्वोच्च निकाय और केंद्रीय ढांचे को लगभग पूरी तरह से ध्वस्त कर दिए जाने के बाद देश नक्सलियों से मुक्त हो गया है। इसके साथ ही कहा कि कांग्रेस ने उग्रवादियों की हिंसा के लंबे दौर को समाप्त करने के लिए कुछ नहीं किया है।

लोकसभा में गृह मंत्री ने क्या कहा? 
लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर बहस हुई। इसका जवाब देते हुए गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कई बार सार्वजनिक रूप से नक्सल समर्थकों के साथ देखा गया।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल से माओवादियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण वीडियो भी पोस्ट किए। गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “कल लोकसभा में गृह मंत्री ने चमत्कार कर दिखाया। उन्होंने 90 मिनट तक जमकर भाषण दिया और एक बार भी अपने पसंदीदा अपशब्द का इस्तेमाल नहीं किया, जिसे पहले कई बार रिकॉर्ड से हटाना पड़ा था।

कांग्रेस नेता ने एक्स पर क्या कहा था?
कांग्रेस नेता रमेश ने इस महीने की शुरुआत में एक्स को टैग करते हुए अपनी पोस्ट में गृह मंत्री पर कटाक्ष किया।  उन्होंने कहा था कि लोकसभा में उनके की ओर से  बोले गए उनके पसंदीदा शब्दों में से एक को हटा दिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष पद से ओम बिरला को हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव को निचले सदन में तीखी बहस के बाद खारिज कर दिए जाने के बाद  गृह मंत्री अमित शाह पर यह कटाक्ष किया गया था। बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह  ने राहुल गांधी के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्हें सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सत्रों के दौरान अक्सर विदेश में रहते थे और जानबूझकर चर्चाओं में शामिल नहीं होते थे क्योंकि वे बोलना नहीं चाहते थे। दो दिन तक चली बहस के अंत में जब गृह मंत्री अपना भाषण समाप्त कर रहे थे, तब विपक्षी सदस्य सदन के वेल में जाकर विरोध प्रदर्शन करने लगे और नारे लगाने लगे। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की कुछ टिप्पणियों के लिए माफी की मांग की थी, जिन्हें उन्होंने “अपमानजनक” बताया था। सोमवार को लोकसभा में अपने संबोधन में शाह ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1970 के दशक में तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश में हुए चुनाव में नक्सलियों का समर्थन स्वीकार किया था। वे माओवादी विचारधारा से “प्रभावित” रहीं थीं। उन्होंने छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों के समर्थन के बिना रेड कॉरिडोर का निर्माण नहीं हो सकता था।” यह बहस गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सली हिंसा के उन्मूलन के लिए घोषित समय सीमा से एक दिन पहले आयोजित की गई थी। पिछले साल गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि देश में 31 मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) समाप्त हो जाएगा।  नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सल मुक्त भारत है; कोई भी शोधकर्ता इसे स्वीकार करेगा।”

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