दुबई के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार संवाद: भारत–यूएई साझेदारी में निवेश और प्रगति के खुल रहे हैं नये अवसर

सीताराम मेवाती l मुंबई
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई ने ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ (AIAI) और दुबई मल्टी कमोडिटीज़ सेंटर (DMCC) के सहयोग से इंटरनेशनल ट्रेड डायलॉग विद दुबई का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अमीरात की उत्कृष्ट व्यावसायिक संभावनाओं और रणनीतिक लाभों को उजागर करना था। इस अवसर पर व्यापारिक नेताओं, वाणिज्यिक अधिकारियों और उद्योग से जुड़े हितधारकों ने भाग लिया और द्विपक्षीय विकास एवं सहयोग के नए अवसरों की खोज पर चर्चा की। इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई की ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन निदेशक प्रिया पानसरे ने यूएई की दूरदर्शी भूमिका पर प्रकाश डाला l उन्होंने कहा कि जिसने वैश्विक साझेदारी को मजबूत बनाने और भारत–यूएई के बीच बढ़ते रिश्तों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस अवसर पर प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. विजय कलंत्री, चेयरमैन, MVIRDC WTC इंडिया एवं अध्यक्ष, AIAI; संयुक्त अरब अमीरात के मुंबई में कॉन्सुल जनरल हिज एक्सेलेंसी अब्दुल्ला हुसैन अलमरजूकी; DMCC के एशिया एवं पूर्वी यूरोप के क्षेत्रीय प्रतिनिधि बैसल बिटार; DMCC IRO के प्रमुख सिद्धार्थ शाह; दुबई चेंबर्स के भारत में मुख्य प्रतिनिधि अभिजीतसिंह जडेजा; तथा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के उपाध्यक्ष कैप्टन सोमेश बत्रा उपस्थित रहे। डॉ. विजय कलंत्री नेअपने अध्यक्षीय संबोधन में यूएई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए इसे भारत का सच्चा मित्र और रणनीतिक साझेदार बताया। विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स में 72,000 से अधिक भारतीय कंपनियां पंजीकृत हैं जो एक अच्छी व्यापारिक मिसाल है l इतनी बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियों वहां पर होना दुबई की पारदर्शी प्रक्रियाओं और कारोबारी सुगमता का प्रमाण है। संयुक्त अरब अमीरात के मुंबई में कॉन्सुल जनरल हिज एक्सेलेंसी अब्दुल्ला हुसैन अलमरजूकी ने अपने मुख्य संबोधन में बताया कि 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद भारत–यूएई द्विपक्षीय व्यापार FY25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है। उन्होंने यूएई की सुदृढ़ व्यावसायिक संरचना, कर-अनुकूल नीतियों, राजनीतिक स्थिरता और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था को निवेश के लिए प्रमुख कारण बताया। बैसल बिटार ने DMCC को एक गतिशील फ्री ज़ोन और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में पेश किया, जो 290 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जुड़ा है और आकर्षक रेजीडेंसी विकल्प प्रदान करता है। सिद्धार्थ शाह ने जोड़ा कि लगभग 4,000 भारतीय कंपनियां DMCC में पंजीकृत हैं, जो कम लागत वाले लीज़, अनुकूल नियमों और कर प्रोत्साहनों का लाभ उठा रही हैं। दुबई चेंबर्स के भारत में मुख्य प्रतिनिधि अभिजीतसिंह जडेजा ने दुबई की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर जोर दिया, जो 4 घंटे की उड़ान में 2.5 अरब और 8 घंटे की उड़ान में 5 अरब लोगों से जोड़ता है। कार्यक्रम का समापन कैप्टन सोमेश बत्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने भारत–यूएई संबंधों के सतत विकास पर विश्वास व्यक्त किया और अवसंरचना, व्यापार विविधीकरण तथा ज्ञान-साझाकरण में और गहन सहयोग का आह्वान किया।



