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मोहन भागवत के कार्यक्रम में पहुंचे कुलपति, केरल में छिड़ा सियासी संग्राम; भाजपा और यूडीएफ आमने-सामने

केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मौजूदगी को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपतियों के शामिल होने के बाद भाजपा और कांग्रेस नीत यूडीएफ के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी नेताओं और सरकार के मंत्रियों ने कुलपतियों की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा नेताओं ने इसका खुलकर बचाव किया है। इससे राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब तीनों विश्वविद्यालयों के कुलपति तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में पहुंचे, जहां मोहन भागवत ने संबोधन दिया। कांग्रेस नीत यूडीएफ नेताओं ने इसे विश्वविद्यालयों की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि कुलपति जैसे संवैधानिक और शैक्षणिक पदों पर बैठे लोगों को किसी वैचारिक संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने से बचना चाहिए। यूडीएफ नेताओं ने इसे गंभीर चूक बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है। इस मुद्दे ने देखते ही देखते राजनीतिक रंग ले लिया और सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई।

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