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पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को अदालत से मिली बड़ी राहत, 22 साल पुराने मामले में हुए बरी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 साल पुराने एक आपराधिक मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला 2004 की एक एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 420, 468, 471 और 120बी के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत आरोप लगाए गए थे। मालूम हो कि दाएं हाथ के बल्लेबाज जैकब मार्टिन ने भारत के लिए 10 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 22.57 की औसत से 158 रन बनाए हैं। 
क्या था पूरा मामला?
जैकब पर जाली यूके आव्रजन (इमिग्रेशन) स्टाम्प, यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप थे, जिन्हें साबित नहीं किया जा सका। अदालत ने पाया कि वित्तीय लेनदेन या अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके स्वामित्व या नियंत्रण को लेकर कोई भी विश्वसनीय सबूत नहीं था। इसके अलावा, कई गवाह भी इन आरोपों को साबित करने में विफल रहे। मीडिया से बात करते हुए मार्टिन ने बताया कि यह मामला 2004 में उनकी टीम के एक सदस्य द्वारा ब्रिटेन का वीजा समाप्त होने के बाद वहां रुकने और फर्जी आव्रजन स्टाम्प लगवाकर भारत लौटने के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि मूल एफआईआर में उनका नाम नहीं था, लेकिन बाद में जांच के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते उनकी प्रोफाइल की वजह से उनका नाम जोड़ दिया गया।
आरोप के कारण गंवानी पड़ी थी रेलवे की नौकरी
मार्टिन ने साझा किया कि इस 22 साल पुराने मामले के कारण उन्हें भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और उनकी रेलवे की नौकरी भी चली गई। उन्होंने कहा कि इस मामले से बरी होना उनके जीवन में एक बहुत बड़ा मोड़ और राहत की बात है। घटना के बारे में बताते हुए मार्टिन ने कहा, 2004 में टीम इंग्लैंड खेलने गई थी। जो टीम 2004 में इंग्लैंड खेलने गई थी, उसमें से एक लड़के को छोड़कर बाकी सब वापस आ गए जो ब्रिटेन में ही रुक गया। चूंकि वीजा की वैधता छह महीने की थी, वह छह महीने तक रह सकता था, लेकिन वह इससे अधिक समय तक रुका रहा। इसलिए उसने किसी के जरिए वहां फर्जी स्टैंपिंग करवा ली। फर्जी स्टैंपिंग कराने के बाद जब वह भारत वापस आया, तो उसे ब्रिटेन से डिपोर्ट कर दिया गया था। इसलिए उसे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया और फिर उससे पूछताछ की गई। उन्होंने आगे कहा, मेरा नाम एफआईआर में भी नहीं था, लेकिन जब जांच हुई, तो मुझे इस मामले में घसीटा गया क्योंकि नाम बड़ा था और मैं एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर था। इन 22 वर्षों के दौरान, मुझे बीसीसीआई से भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। मैंने रेलवे में अपनी नौकरी खो दी। इसलिए इसकी वजह से मुझे बहुत तनाव था, लेकिन अब जो यह फैसला आया है मुझे क्लीन चिट मिल गई है। यह मेरे जीवन के लिए एक बहुत बड़ा समाधान होगा और यह मेरे जीवन के लिए एक बहुत बड़ा यू-टर्न है।

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