गौरव भाटिया ने किया विपक्ष पर तीखा हमला, कहा- संविधान कमजोर करने की हो रही कोशिश

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुरुवार विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक हालात दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई हैं। उन्होंने विपक्ष पर अराजकता का माहौल बनाने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने के आरोप बेबुनियाद हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाटिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की मूल भावना का सम्मान किया है। पिछले 25 वर्षों से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर संवैधानिक तरीके से लोगों की सेवा की है। भाटिया ने कहा, ‘सबसे पहले, हमने देखा है कि आज भारत में जो स्थिति है, वह असल में दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई है। कल हर नागरिक को गर्व महसूस हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की मूल भावना का सम्मान किया है और पिछले 25 वर्षों में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में संवैधानिक तरीके से देश के लोगों की सेवा की है। यह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।’
विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां संवैधानिक मूल्यों और जनता की सेवा को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष अराजकता का माहौल बना रहा है और संविधान को कमजोर कर रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से लोकतंत्र को खत्म करने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं। वे यह सवाल खड़ा करते हैं कि इन आरोपों का आधार क्या है? ये आरोप एक गैर-जिम्मेदार विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे हैं और पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। लोकतंत्र को खत्म करने और संविधान को कमजोर करने के दावों का कोई आधार नहीं है और न ही इसका कोई सबूत है।’
आम आदमी पार्टी को लेकर क्या कहा?
इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘स्वराज’ के नारे के साथ राजनीति में आई आम आदमी पार्टी आज ‘गुंडा राज’ वाली पार्टी बन गई है।’ चुनावों के दौरान उम्मीदवारों को परेशान करने और उनके काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने जो बात बताई है। मैं उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पढ़कर सुना रहा हूं। आयोग का मुख्य निष्कर्ष यह है कि बड़े पैमाने पर बाधाएं डाली गईं। इसका मतलब है कि दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों और निर्दलीय उम्मीदवारों को हर जगह रोका गया और उन पर दबाव डालकर या उन्हें परेशान करके उनके नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया। उनके नामांकन फॉर्म जबरदस्ती उनके हाथों से छीनकर फाड़ दिए गए या नष्ट कर दिए गए। समिति ने इन निष्कर्षों को दर्ज किया और सुप्रीम कोर्ट ने उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।’



