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कामयाबी का मंत्र…ईमानदारी, समर्पण, परिश्रम; ले. जनरल मनजिंदर सिंह ने बच्चों को दी अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति

इमानदारी, समर्पण और अथक परिश्रम का कोई मुकाबला नहीं है, जो बच्चे इसे अपने चरित्र में उतारेंगे, वही कल को देश का नेतृत्व करेंगे। बच्चे सच्चे मन से केवल मेहनत पर ध्यान केंद्रित करेंगे, फिर देखेंगे कि सफलता कैसे उनके कदम चूमेगी। यह बातें भारतीय थल सेना की दक्षिण पश्चिम कमान (सप्त शक्ति कमान) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार को देश के होनहार छात्रों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कही। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब नग्गी युद्ध स्मारक पर आयोजित गरिमामयी आयोजन मे लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने 44 मेधावी छात्रों को अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति से सम्मानित किया। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सीईओ मेजर जनरल अशीम कोहली, अमर उजाला फाउंडेशन टीम के सदस्य और भारतीय सेना के सभी अफसर व सैनिक उपस्थित रहे। लेफ्टिनेंट जनरल ने नग्गी युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच टाइग्रिस टेंथ के बैंड के साथ शहीदों को सलामी दी गई। उन्होंने विजिटर रजिस्टर में अपने संदेश दर्ज किए। फिर स्मारक इतिहास को जानने के लिए संग्रहालय का दौरा किया।

Lieutenant General Manjinder Singh presented Atul Maheshwari Scholarship to children
‘ऐसे ही और भी बच्चे यहां पर आएं’
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह जगह 1971 युद्ध के इतिहास के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है, वे चाहते हैं ऐसे और भी बच्चे यहां पर आएं। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन जिस तरह से समाज के पिछड़े, आपदा से ग्रसित लोगों को उभारने, उनके लिए संबल बनने के लिए काम कर रहा है, उसकी जितनी सराहना की जाए कम है।
दूरबीन से सीमा-पार का निरीक्षण किया
छात्रों ने दूरबीन से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार स्थित पाकिस्तानी चौकियों का निरीक्षण किया। तीर कमान से निशाना भी लगाया। मौके पर उपस्थित आर्मी के जवानों ने बताया कि यहां से करीब दो किलोमीटर दूर सतलुज नदी पंजाब से होकर पाकिस्तान में बहती है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंचकर भारतीय सेना को करीब से देख पाना बच्चों के लिए उत्साह और प्रेरणा से भरपूर रहा। अपनी इस यात्रा के बाद कई बच्चों ने आर्मी में जाने का निर्णय लिया है।

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