मंत्री विखे पाटिल ने खारिज किए धोखाधड़ी के आरोप, किसानों के नाम पर लोन लेने का मामला

महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बुधवार को उन पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एक चीनी कारखाने से संबंधित मामले में आपराधिक अपराध की संभावना को खारिज कर दिया था। विखे पाटिल का स्पष्टीकरण उनके और एक चीनी मिल के निदेशकों सहित 53 अन्य के खिलाफ एक दिन पहले दर्ज की गई एफआईआर के जवाब में आया है। अदालत के निर्देश के बाद सोमवार को अहिल्यानगर जिले के लोनी पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जल संसाधन मंत्री पाटिल पर 2004 में जाली दस्तावेजों का उपयोग करके किसानों ने नाम पर कथित तौर पर लगभग 9 करोड़ रुपये का अवैध ऋण हासिल करने का आरोप है। भाजपा नेता ने कहा कि वह चीनी मिल मामले में किसी भी नई जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका इसमें कोई आपराधिक मामला नहीं बनता
विखे पाटिल ने कहा कि पद्मश्री डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल सहकारी चीनी कारखाने से संबंधित जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने के बाद, 2019 में अदालत द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया था कि इस मामले में कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है। इसलिए उन्हें इस मामले में कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में फिर से जांच होती है, तो वे उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाया कि वे चीनी सहकारी चुनाव नजदीक आने पर पुराने मामलों को उठाकर राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं। भाजपा मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि यह मामला पहले स्थानीय कोर्ट, हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में साफ कर दिया था कि इसमें कोई अपराध नहीं हुआ है, इसलिए मामला वहीं खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि राहाता की मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज की है। जांच तभी शुरू हो सकती है जब एफआईआर दर्ज हो। इसलिए फैक्ट्री प्रबंधन दर्ज अपराध के आधार पर किसी भी नई जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है।
किसानों के खातों में कभी जमा नहीं की गई ऋण राशि
शिकायत के अनुसार, यह अनियमितता 2004 में हुई थी। मिल के तत्कालीन अध्यक्ष और निदेशकों ने कथित तौर पर सदस्य किसानों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके ऋण प्रस्ताव तैयार किए। बैंक अधिकारियों की मदद से, उन्होंने कथित तौर पर 3.11 करोड़ रुपये और 5.74 करोड़ रुपये का ऋण हासिल किया। हालांकि, जिन किसानों के नाम पर प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे, उनके खातों में ऋण राशि कभी जमा नहीं की गई। इसके बजाय, चीनी मिल अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों द्वारा पैसे हड़प लिए गए।
एफआईआर दर्ज होने से हमें कोई झटका नहीं लगा: पाटिल
मुंबई में बोलते हुए विखे पाटिल ने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें झटका लगा है। मंत्री ने कहा, ‘तथ्यों को समझे बिना खबरें फैलाई जा रही हैं। यह मामला 2004 से चल रहा है। सभी फैसले उनके (शिकायतकर्ता) खिलाफ गए हैं। हमें कोई झटका नहीं लगा है…हम झटका देते हैं। यह हताशा के कारण है। हमें कोई खतरा नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हमें क्लीन चिट दे दी है।’



