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क्या आप भी देर रात तक जागते हैं? नींद की कमी से सेहत को हो सकते हैं ये चार गंभीर नुकसान

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद नहीं आना एक आम समस्या बन गई है। इस परेशानी को अनिद्रा या इन्सोम्निया कहते हैं, यह एक ऐसी चुनौती है जिससे शायद हम में से अधिकांश लोग कभी न कभी दो-चार हुए होंगे। देर रात तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना, काम का तनाव, या बस मन की उथल-पुथल ऐसे कई कारण हैं जो हमें बिस्तर पर करवटें बदलने पर मजबूर कर देते हैं। धीरे-धीरे, यह नींद न आने की आदत हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। बता दें कि यह सिर्फ थकान का मामला नहीं है। नींद की कमी हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर और नकारात्मक प्रभाव डालती है। पर्याप्त नींद न मिलने से न केवल अगले दिन एनर्जी की कमी महसूस होती है, बल्कि यह हमारी एकाग्रता, याददाश्त, मूड और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर कर सकती है। लंबे समय तक नींद की कमी उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को भी बढ़ा सकती है।
दरअसल, नींद की कमी न केवल थकान का कारण बनती है, बल्कि  स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना 6-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद जरूरी है। अगर नींद नहीं पूरा हो पाता है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं होती हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए। नींद की कमी सीधा मस्तिष्क पर असर डालती है, जिससे मूड स्विंग्स की समस्या बढ़ती है। इन्सोम्निया के कारण चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) जैसे लक्षण देखे जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नींद की कमी मानसिक स्वास्थ्य को 30-40% तक प्रभावित कर सकती है। रात में पर्याप्त नींद न लेने से सेरोटोनिन जैसे मूड नियंत्रक हार्मोन का संतुलन खराब होता है, जिससे मूड स्विंग्स बढ़ने लगता है। नींद की कमी और वजन बढ़ने का गहरा संबंध है। कम नींद लेने से भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन, जैसे लेप्टिन और घ्रेलिन, असंतुलित हो जाते हैं। इससे भूख बढ़ती है और जंक फूड खाने की इच्छा होती है। अध्ययनों के अनुसार, 5 घंटे से कम नींद लेने वाले लोगों में मोटापे का खतरा 50% तक बढ़ जाता है। नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को भी धीमा करती है, जिससे वजन नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
3. फोकस की कमी और निर्णय लेने की क्षमता में कमी
नींद की कमी मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, जिससे एकाग्रता (फोकस) और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है। इन्सोम्निया के कारण मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर असर पड़ता है, जो तार्किक सोच और निर्णय लेने में हमारी मदद करता है। इससे कार्यक्षेत्र में गलतियां, भूलने की आदत और प्रोडक्टिविटी में कमी आती है।
4. गट हेल्थ खराब होना
नींद की कमी पाचन तंत्र और गट हेल्थ को भी प्रभावित करती है। गट माइक्रोबायोम, जो पाचन और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है, नींद पूरी न होने से या कम सोने से बिगड़ सकता है। इससे कब्ज, एसिडिटी और आंतों की सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अध्ययनों के अनुसार, इन्सोम्निया गट माइक्रोबायोम की विविधता को 20% तक कम कर सकती है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
Insomnia Late sleep can cause these 4 problems kam sone se kya pareshani hoti hai

नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित समय पर सोएं, स्क्रीन टाइम कम करें, और सोने से पहले मेडिटेशन या गहरी सांस लें। हल्का भोजन करें और कैफीन से बचें। योग और व्यायाम भी नींद को बेहतर बनाते हैं। यदि इन्सोम्निया की समस्या गंभीर हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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