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विटामिन डी से धीमी पड़ सकती है उम्र बढ़ने की रफ्तार, धूप का पर्याप्त सेवन नहीं करने से लोगों में कमी आम

उम्र बढ़ने को लेकर अक्सर यही समझा जाता है कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता। हालांकि वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि विटामिन डी की नियमित खुराक जैविक उम्र बढ़ने की गति को धीमा कर सकती है। विटामिन डी उन पोषक तत्वों में से एक है जो शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है। शरीर में इसकी कमी का कई बार लोगों को एहसास भी नहीं होता। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों का यह महत्वपूर्ण शोध  अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि विटामिन डी शरीर की कोशिकाओं के भीतर उम्र बढ़ने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संरचना टेलोमेरेस की रक्षा करता है, जिससे व्यक्ति अधिक समय तक युवा और स्वस्थ बना रह सकता है। टेलोमेरेस गुणसूत्रों के सिरों पर मौजूद छोटे सुरक्षात्मक ढक्कन होते हैं, जो समय के साथ घिसने लगते हैं। इनकी लंबाई कम होना दिल की बीमारियों, कैंसर और अन्य गंभीर उम्र संबंधी रोगों का संकेत माना जाता है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने चार साल तक   1,000 से अधिक प्रतिभागियों का अध्ययन किया, जिनमें महिलाएं 55 वर्ष से ऊपर और पुरुष 50 वर्ष से ऊपर थे। अध्ययन के निष्कर्षों में पाया गया कि विटामिन डी लेने वाले समूह में टेलोमेरेस की लंबाई में गिरावट काफी कम थी। इससे यह अनुमान लगाया गया कि विटामिन डी ने कोशिकीय उम्र बढ़ने की दर करीब तीन वर्षों तक धीमा कर दिया। विटामिन डी को आमतौर पर सनशाइन विटामिन कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में तब बनता है जब सूरज की रोशनी त्वचा पर पड़ती है। यह शरीर के भीतर कई बेहद जरूरी कार्यों में भूमिका निभाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, क्योंकि यह कैल्शियम के अवशोषण को सुनिश्चित करता है।
वर्तमान जीवन शैली में शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिलती
शोधकर्ताओं का कहना है कि आज की जीवनशैली में अधिकांश लोग घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिलती और विटामिन डी की कमी आम होती जा रही है। ऐसे में विटामिन डी की पूर्ति के लिए वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड दूध और अनाज जैसे खाद्य पदार्थ या डॉक्टर की सलाह से ली गई डी3 की कैप्सूल सहायक हो सकती है।

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