‘लोगों से जुड़ती है मेट्रो इन दिनों की कहानी’, अनुपम खेर ने की निर्देशक अनुराग बसु की तारीफ

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अनुपम खेर इन दिनों अनुराग बसु की फिल्म ‘मेट्रो इन दिनों’ को लेकर चर्चाओं में बने हुए हैं। अभिनेता फिल्म के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। फिल्म की रिलीज से पहले उन्होंने अमर उजाला डिजिटल से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ अपनी आने वाली फिल्मों पर बात की, बल्कि इंडस्ट्री से जुड़े कुछ गंभीर मुद्दों पर भी अपनी राय बेबाक अंदाज में रखी। जब अनुपम खेर से पूछा गया कि वह फिल्म ‘मेट्रो इन दिनों’ की जर्नी को कैसे बयां करेंगे, तो उन्होंने कहा, ‘पता ही नहीं लगा कि कब यह जर्नी शुरू हुई और कब चलती रही। जिस जर्नी का पता नहीं चलता, वही सबसे अच्छी होती है। चाहे आप किसी पार्ट कम्पार्टमेंट में बैठे हो या फर्स्ट क्लास में, या एसी में – अगर सफर अच्छा है तो डेस्टिनेशन भी अच्छा ही होगा। यही इस फिल्म का अनुभव है। यह फिल्म हर किसी से किसी न किसी रूप में जुड़ती है। इसकी कहानी ऐसी है जो लोगों से जुड़ती है, क्योंकि वह अनुभव निर्देशक का है। अनुराग के साथ काम करना हमेशा वंडरफुल होता है।’ अनुराग बसु के बारे में बात करते हुए अनुपम ने कहा, ‘मुझे नहीं पता था कि वह जितनी अच्छी फिल्में बनाते हैं, उतना अच्छा खाना भी बनाते हैं। वह बहुत ही मल्टी टैलेंटेड हैं। डांस भी करते हैं, गाना भी गाते हैं और खाना तो कमाल का बनाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सेट पर भी वह ऐसा माहौल रखते हैं कि कोई स्ट्रेस नहीं होती। कुछ डायरेक्टर सेट पर आते ही एक दबाव बना देते हैं, लेकिन अनुराग बिलकुल अलग हैं। वो कभी नहीं जताते कि वह कोई बहुत कमाल की फिल्म बना रहे हैं। फिल्म बनने के बाद भी जब पूछो कैसी बनी है, तो बस इतना ही कहते हैं ठीक है, देखते हैं।’
‘वर्क-लाइफ बैलेंस जरूरी, पर मेहनत की अहमियत न भूलें’
आजकल के आर्टिस्ट के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस एक अहम बात बन गई है। इस पर अनुपम ने कहा, ‘उन ऐक्टर्स से जाकर बात करनी चाहिए जो वर्क-लाइफ बैलेंस की बात करते हैं। पता नहीं इतने वर्षों बाद भी वो लोग काम कर रहे होंगे या नहीं। मैं ये बात घमंड से नहीं कह रहा, लेकिन हमने बहुत लोगों को आते-जाते देखा है। हमें काम की अहमियत भी पता है और उस मेहनत की भी जो इसके पीछे लगती है। सफलता को कभी भी पक्का नहीं मानना चाहिए। काम के प्रति सम्मान और लगातार मेहनत ही आपकी पहचान बनाती है।’

अनुपम खेर ने साफ कहा कि उन्हें अवॉर्ड्स मिलने की खुशी होती है और न मिलने पर तकलीफ भी। उन्होंने कहा, ‘बचपन से हमें सिखाया गया था कि मेहनत करोगे, तेज दौड़ोगे, तो फर्स्ट आओगे और अवॉर्ड मिलेगा। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो कहते हैं कि अवॉर्ड्स जरूरी नहीं होते। मुझे अच्छा लगता है जब अवॉर्ड मिलता है। और जब नहीं मिलता, तो तकलीफ भी होती है।’ उन्होंने माना कि कई बार उन्हें अच्छे काम के बावजूद अवॉर्ड नहीं मिला। ‘खोसला का घोंसला’ और ‘स्पेशल 26’ इन दोनों फिल्मों के लिए मुझे कोई अवॉर्ड नहीं मिला। थोड़ा अफसोस जरूर होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप मेहनत करना छोड़ दें। इतने वर्षों के अनुभव के बावजूद अनुपम खेर मानते हैं कि उन्हें आज भी फिल्मों की रिलीज से पहले नर्वसनेस होती है। उन्होंने कहा कि हर बार होता है। चाहे थिएटर का प्ले हो, फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हो या रिलीज घबराहट होती है, क्योंकि आपने मेहनत की है और चाहते हैं कि फिल्म लोगों तक पहुंचे, पसंद की जाए।
‘तन्वी द ग्रेट’ के लिए उत्साहित हैं अनुपम
अपने आने वाले प्रोजेक्ट पर बात करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने एक फिल्म डायरेक्ट की है – ‘तन्वी द ग्रेट’। इस फिल्म को लेकर बहुत मैं बहुत एक्साइटेड हूं। यह मेरी डायरेक्ट की हुई फिल्म है और 18 जुलाई को रिलीज होगी।



