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रोमांटिक हीरो से ‘संस्कारी बाबूजी’ तक का सफर, फिर एक विवाद ने बर्बाद कर दिया करियर

बॉलीवुड और टीवी की दुनिया में ‘संस्कारी बाबूजी’ के नाम से पहचान बनाने वाले आलोक नाथ ने अपनी अभिनय सफर में एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जहां हर घर में उनका नाम इज्जत और मर्यादा से जोड़ा जाने लगा। लेकिन ये सुनहरी छवि एक विवाद के बाद अचानक चकनाचूर हो गई। 10 जुलाई यानी आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे आलोक नाथ की जिंदगी में जहां एक तरफ सफलता की कहानियां हैं, वहीं दूसरी ओर विवादों का साया भी है। 10 जुलाई 1986 को दिल्ली में जन्मे आलोक नाथ के पिता एक डॉक्टर थे और चाहते थे कि उनका बेटा भी वही पेशा अपनाए। लेकिन कॉलेज के दिनों में आलोक की रुचि रंगमंच की ओर मुड़ गई। उन्होंने रुचिका थिएटर ग्रुप से जुड़कर अभिनय की बारीकियां सीखीं और फिर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में तीन साल तक प्रशिक्षण लिया। यहीं से उन्हें 1982 की ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ में एक छोटी भूमिका मिली, जिससे उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। इस फिल्म के लिए उन्हें 20 हजार रुपये मिले थे और यहीं से उन्होंने पिता की मंजूरी भी जीत ली। कम ही लोग जानते हैं कि आलोक नाथ ने अपने करियर की शुरुआत रोमांटिक हीरो के रूप में की थी। फिल्म कामाग्नि (1987) में उन्होंने कई रोमांटिक सीन किए, जिसके बाद वो स्टार बन गए थे। इसके अलावा वो ‘षड्यंत्र’, ‘विनाशक’ जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका में भी नजर आए। लेकिन जल्द ही उनकी छवि एक आदर्श पिता के रूप में बनने लगी।
‘संस्कारी बाबूजी’ की पहचान
1990 के दशक में जब राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्में आईं, तो आलोक नाथ की छवि पूरी तरह बदल गई। ‘हम आपके हैं कौन’, ‘मैंने प्यार किया’, ‘विवाह’, ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसी फिल्मों में उन्होंने भावनात्मक पिता की भूमिका निभाई। टीवी पर भी ‘बुनियाद’, ‘सपना बाबुल का बिदाई’, ‘वो रहने वाली महलों की’ जैसे शोज में वो ‘बाबूजी’ बनकर लोगों के दिलों में बस गए।
1990 के दशक में जब राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्में आईं, तो आलोक नाथ की छवि पूरी तरह बदल गई। ‘हम आपके हैं कौन’, ‘मैंने प्यार किया’, ‘विवाह’, ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसी फिल्मों में उन्होंने भावनात्मक पिता की भूमिका निभाई। टीवी पर भी ‘बुनियाद’, ‘सपना बाबुल का बिदाई’, ‘वो रहने वाली महलों की’ जैसे शोज में वो ‘बाबूजी’ बनकर लोगों के दिलों में बस गए।

लेकिन ये आदर्श छवि साल 2018 में तब टूट गई जब फिल्ममेकर और लेखिका विंता नंदा ने उन पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया। ये मामला इतना बड़ा हुआ कि आलोक नाथ का करियर लगभग खत्म हो गया। उन्हें काम मिलना एक दम बंद हो गया। हालांकि इस मामले में अदालत ने उन्हें राहत दी, लेकिन उनकी छवि पर लगा दाग कभी नहीं मिट सका। उसके बाद से उन्हें किसी फिल्म या शो में नहीं देखा गया। आखिरी बार वह 2019 की फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में नजर आए थे।
अब गुमनामी भरी जिंदगी जी रहे आलोक
‘मी टू’ विवाद के बाद आलोक नाथ ने न केवल फिल्मी दुनिया से बल्कि सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली। उनके करीबी कलाकारों ने बताया कि वो इस पूरे मामले से बेहद आहत हैं और अब काफी बदल चुके हैं। कभी विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाने वाले आलोक अब कठोर और चुपचाप हो गए हैं। उनकी करीबी दोस्त नारायणी शास्त्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो अब बातचीत भी बहुत कम करते हैं।
‘मी टू’ विवाद के बाद आलोक नाथ ने न केवल फिल्मी दुनिया से बल्कि सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली। उनके करीबी कलाकारों ने बताया कि वो इस पूरे मामले से बेहद आहत हैं और अब काफी बदल चुके हैं। कभी विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाने वाले आलोक अब कठोर और चुपचाप हो गए हैं। उनकी करीबी दोस्त नारायणी शास्त्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो अब बातचीत भी बहुत कम करते हैं।



