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ट्रंप के खिलाफ केस संभाल रहे वकीलों पर फिर गिरी गाज, अमेरिका में न्याय विभाग ने फिर की छंटनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ चल रहे मामलों से जुड़े कई वकीलों और सहयोगी कर्मचारियों को अमेरिकी न्याय विभाग ने हटा दिया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह छंटनी विशेष वकील जैक स्मिथ की टीम से जुड़े उन लोगों पर हुई है जो ट्रंप के खिलाफ दो बड़े मामलों में काम कर रहे थे। एक गोपनीय दस्तावेज रखने और दूसरा चुनाव नतीजों को पलटने की साजिश पर काम कर रहे थे। रिपोर्ट में दो ऐसे लोगों के हवाले से दावा किया गया है जो इस निर्णय से सीधे तौर पर जुड़े हैं, लेकिन उन्होंने नाम उजागर नहीं किया। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को हटाया गया है, उनमें कुछ वकील, जांच में सहयोग करने वाले न्याय विभाग के अन्य कर्मचारी और गैर-कानूनी स्टाफ शामिल हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने लोगों को हटाया गया है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप से जुड़े मामलों में काम कर रहे लोगों को हटाया गया है। जनवरी 2025 में न्याय विभाग ने बताया था कि उसने ट्रंप पर मुकदमा चलाने वाले दर्जनों वकीलों को बर्खास्त कर दिया था। इसके अलावा जून में भी तीन वकीलों को हटाया गया था जो 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल पर हुए दंगे से जुड़े मामलों की जांच में शामिल थे। साल 2023 में विशेष वकील जैक स्मिथ की टीम ने ट्रंप पर दो अहम मामलों में आरोप लगाए थे। पहला मामला फ्लोरिडा स्थित उनके मार-ए-लागो घर में गोपनीय दस्तावेजों को रखने से जुड़ा था और दूसरा, 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को बदलवाने की साजिश से जुड़ा था। हालांकि, इनमें से किसी भी मामले की सुनवाई ट्रायल तक नहीं पहुंच पाई।
सुप्रीम कोर्ट और ट्रंप-नियुक्त जज के फैसले बने वजह
ट्रंप को मिली कानूनी राहत के पीछे दो अहम फैसले रहे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में फैसला सुनाया कि कोई भी पूर्व राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के दौरान किए गए आधिकारिक कार्यों के लिए अभियोजन से सुरक्षित है। इसके अलावा, फ्लोरिडा की एक अदालत ने फैसला सुनाया कि विशेष वकील जैक स्मिथ की नियुक्ति ही अवैध थी, जिसके चलते गोपनीय दस्तावेजों वाला मामला भी गिरा दिया गया।
चुनाव जीतने के बाद केस हटाने का फैसला
साल 2024 में ट्रंप की चुनावी जीत के बाद जैक स्मिथ ने दोनों मामले वापस ले लिए। उन्होंने यह निर्णय न्याय विभाग की उस कानूनी राय के आधार पर लिया जिसमें कहा गया है कि किसी भी मौजूदा राष्ट्रपति पर संघीय मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

 

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