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‘आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को भाजपा में शामिल किया जा रहा’, विधानभवन में झड़प पर राउत का तंज

महाराष्ट्र विधानभवन में भाजपा और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं के समर्थकों के बीच हुई झड़प के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इसे ‘गैंगवार’ बताया है और दावा किया कि भाजपा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जगह दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस्तीफा देने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। संजय राउत ने कहा कि जो कुछ भी महाराष्ट्र विधानभवन में हुआ, वह किसी लोकतांत्रिक राज्य की नहीं बल्कि एक ‘गैंगवार’ की तस्वीर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से हत्या, डकैती और मकोका जैसे गंभीर अपराधों में शामिल लोग वहां मौजूद थे, वह राज्य की छवि को धूमिल करता है। राउत ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज का हवाला देते हुए कहा कि यह दृश्य चौंकाने वाले और शर्मनाक हैं।
भाजपा अपराधियों की भर्ती कर रही 
राउत ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को लगातार शामिल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह आरएसएस और भाजपा की संस्कृति है कि ऐसे लोगों को पार्टी में लाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को खुद की नैतिकता पर गर्व है, तो ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर करना चाहिए। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपनी सरकार को भंग कर देना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि अगर वह सच में कानून के संरक्षक हैं, तो उन्हें गृह विभाग से रिपोर्ट मंगवाकर राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी चाहिए। राउत ने कहा कि यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण या चौंकाने वाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिए शर्मनाक घटना है।
फडणवीस को याद दिलाया पुराना वादा 
संजय राउत ने देवेंद्र फडणवीस को याद दिलाया कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति की गरिमा बनाए रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि आज रोज नए-नए कलंक लग रहे हैं फिर चाहे वह भ्रष्टाचार हो, हनीट्रैप, मारपीट या मंत्रियों के वीडियो। राउत ने कहा कि अगर यही हालात किसी और पार्टी की सरकार में होते, तो फडणवीस सबसे पहले इस्तीफे की मांग करते। राउत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विधानभवन में नेता प्रतिपक्ष का पद ही नहीं चाहती। ऐसा इसलिए ताकि सरकार से कोई कठिन सवाल न पूछे जा सकें। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायक जितेंद्र आव्हाड पर हमला करने की साजिश थी और हथियारों से भरी गाड़ियां विधानभवन परिसर तक पहुंचाई गईं। यह गंभीर मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

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