विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 11वें हेड्स ऑफ मिशन्स (HOM) सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सम्मेलन का बेहतरीन क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की कूटनीति में व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन यानी ‘3टी’ की बढ़ती भूमिका को जिस स्पष्टता से रेखांकित किया, वह बेहद महत्वपूर्ण है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जोखिम कम करने की रणनीति पर जोर
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सम्मेलन में नेबरहुड फर्स्ट नीति, प्रवासी भारतीयों के साथ गहरे संबंध और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच डी-रिस्किंग यानी जोखिम कम करने की रणनीति पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार, व्यापार और टेक्नोलॉजी जगत के विशेषज्ञों के विचारों से सम्मेलन को व्यापक दृष्टिकोण मिला।
मोदी ने अपने संदेश में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में भारत की विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत कर भारत की वैश्विक भागीदारी को और सशक्त बनाने की जरूरत है, साथ ही प्रवासी भारतीयों से संबंधों को और गहरा करने पर भी बल दिया। यह 11वां मिशन प्रमुख सम्मेलन 28 से 30 अप्रैल तक नई दिल्ली के नेशनल एग्रीकल्चरल साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय 2047 के लिए भारतीय कूटनीति में सुधार रखा गया, जिसका उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार करना था। सम्मेलन के दौरान भारत के राजदूतों, उच्चायुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की कूटनीतिक पहुंच को और प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया। विभिन्न सत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों, भू-राजनीतिक बदलावों, व्यापार-तकनीक-पर्यटन (3टी) और भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने मिशन प्रमुखों को भविष्य के लिए तैयार कूटनीति, 3टी के विस्तार और भारत की वैश्विक कहानी को और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर मार्गदर्शन दिया। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ और युवा राजनयिकों के विचार भी सुने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। इससे पहले, 29 अप्रैल को सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए जयशंकर ने कहा था कि पिछले दशक में भारत की वैश्विक भागीदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक अस्थिर और तेजी से बदलती दुनिया में भारतीय कूटनीति राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।