Health&wellnessLatest news

साल 2040 तक 55% बढ़ सकते हैं लिवर कैंसर के मामले, अध्ययनकर्ताओं ने बताए इसके रोकथाम के उपाय

कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिसके मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ये मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हर साल लगभग 1 करोड़ लोगों की कैंसर से मौत हो जाती है। साल 2022 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस साल कैंसर के कारण 97 लाख से ज्यादा मौतें हुईं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौतों की संख्या के लिहाज फेफड़ों का कैंसर सबसे घातक कैंसर है, इसके अलावा ब्रेस्ट-लिवर कैंसर का खतरा और इससे मौत के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। पुरुष-महिला हों या बच्चे सभी इसका शिकार हो रहे हैं। लिवर कैंसर को लेकर द लैंसेंट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने इससे बचाव के लिए कुछ उपायों के बारे में बताया है, जिसका अगर कम उम्र से ही पालन कर लिया जाए तो इस जानलेवा बीमारी से बचाव किया जा सकता है। कैंसर रोग विशेषज्ञों ने पाया कि दुनिया में हर पांच में से लगभग तीन लिवर कैंसर के मामलों के लिए हेपेटाइटिस, शराब की आदत और नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (एनएएफएलडी) जिम्मेदार है। इन जोखिम कारकों पर अगर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो लिवर कैंसर से बचाव किया जा सकता है।

Lancet study says liver cancer may rise 55 percent by 2040 hepatitis and alcohol habits increasing risk

लिवर कैंसर मौत के प्रमुख कारणों में से एक
हांगकांग कैंसर इंस्टीट्यूट, चीन स्थित फुदान यूनिवर्सिटी के अलावा अमेरिका और यूरोप के अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने यह रिपोर्ट तैयार की है। टीम ने पाया कि मेटाबॉलिक समस्याओं ने लिवर कैंसर के जोखिमों को 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसका मु्ख्य कारण लिवर में अतिरिक्त वसा का जमाव होना है। जर्नल ऑफ हेपेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 46 देशों में कैंसर से होने वाली मौतों के शीर्ष तीन प्रकारों में से लिवर कैंसर एक है। इसका जोखिम साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। हांगकांग स्थित चाइनीज यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक स्टीफन चैन ने कहा कि निष्कर्षों से पता चलता है कि वायरल हेपेटाइटिस, शराब और मोटापे जैसे जोखिम कारकों को रोकने के लिए अगर वैश्विक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए जाएं तो ये लिवर कैंसर को रोकने और जीवन बचाने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत कर सकते हैं। हालांकि गंभीर बात ये है कि ये तीनों ही जोखिम कारक काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं जो गंभीर चिंता का विषय है। लेखकों ने कहा कि फैटी लिवर की स्थिति के बढ़ते जोखिम के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से अमेरिका, यूरोप और एशिया में मधुमेह और मोटापे से ग्रस्त लोगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसे लोगों में भविष्य में खतरा अधिक हो सकता है।विशेषज्ञों ने कहा, बढ़ती आबादी और बढ़ते जोखिम कारकों चलते आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर लिवर कैंसर के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका है। अध्ययनों से अनुमान लगाया गया है कि 2040 तक ऐसे मामलों में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा, “हमने अनुमान लगाया है कि कम से कम 60 प्रतिशत लिवर कैंसर को रोका जा सकता है, अगर समय रहते इसके जोखिम कारकों पर ध्यान देकर उन्हें नियंत्रित कर लिया जाए। हेपेटाइटिस बी-सी वायरस, मेटाबॉलिज्म की समस्या की रोकथाम और अल्कोहल जैसी आदतों पर खुद से रोक लगाने की आवश्यकता है।

 हेपेटाइटिस बी-डी तक सभी खतरनाक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण की स्थिति लिवर कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ा सकती है। ये वायरस लिवर में दीर्घकालिक सूजन और क्षति पैदा कर सकते हैं, जिससे सिरोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा हो सकता है, जो लिवर कैंसर का सबसे आम प्रकार है। इसके अतिरिक्त, हेपेटाइटिस डी संक्रमण के कारण भी लिवर कैंसर का खतरा बढ़ता हुआ देखा गया है।  हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (WHO-IARC) ने  हेपेटाइटिस डी को  घातक और कैंसरकारी घोषित किया है। “हर 30 सेकंड में हेपेटाइटिस से संबंधित गंभीर लिवर रोग या लिवर कैंसर के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

Related Articles

Back to top button