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अमेरिकी टैरिफ से तमिलनाडु पर असर पड़ने की आशंका, स्टालिन ने पीएम मोदी से मांगा विशेष राहत पैकेज

तमिनलाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ से पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने केंद्र से विशेष वित्तीय राहत पैकेज देने की मांग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि पैकेज में मूलधन चुकाने पर कुछ समय के लिए रोक दी जानी चाहिए। उन्होंने अमेरिका के साथ परस्पर लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। साथ ही देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सरकार के रुख को पूरा समर्थन भी दिया।

तमिलनाडु दूसरे भारतीय राज्यों की तुलना में टैरिफ से होगा अधिक प्रभावित
स्टालिन ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने 433.6 अरब डॉलर के कुल वस्तु का निर्यात किया था। इसमें से 20 प्रतिशत अमेरिका की हिस्सेदारी थी। वहीं तमिलनाडु के 52.1 अरब डॉलर के कुल वस्तु निर्यात का 31 प्रतिशत अमेरिका को निर्यात किया गया था। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि अमेरिकी बाजार पर इस उच्च निर्भरता का मतलब है कि तमिलनाडु पर टैरिफ का प्रभाव दूसरे भारतीय राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होगा। इस टैरिफ का राज्य के विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

इन क्षेत्रों और नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं वस्त्र, परिधान, मशीनरी, ऑटो घटक, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद और रसायन, ये सभी श्रम-प्रधान क्षेत्र हैं, जहां निर्यात में किसी भी मंदी का परिणाम बड़े पैमाने पर छंटनी के रूप में सामने आएगा। उन्होंने कहा कि 2024-2025 में देश के कपड़ा निर्यात में दक्षिणी राज्य का योगदान 28 प्रतिशत रहा। यह सभी भारतीय राज्यों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लगभग 75 लाख लोग कार्यरत हैं और प्रस्तावित 50 प्रतिशत टैरिफ के साथ, अनुमानित 30 लाख नौकरियां तत्काल खतरे में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु का फलता-फूलता विनिर्माण क्षेत्र पहले कभी न देखे गए संकट का सामना कर रहा है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में लाखों लोगों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। इसलिए, मैं संबंधित मंत्रालयों और उद्योग हितधारकों के परामर्श से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करता हूं।

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