बेलारूस ने थामे मासूम हाथ, लोनावला के अनाथ बच्चों की खुशियों का सपना हुआ साकार

सीताराम मेवाती l मुंबई
आमतौर पर लोनावला को लोग पर्यटन स्थल के रूप में जानते हैं, लेकिन इसी इलाके के भजे गाँव में स्थित समर्पक अनाथाश्रम और लिली इंग्लिश मीडियम स्कूल है l यहाँ के बच्चों को हाल ही में जीवन का अनोखा अवसर मिला। यहाँ के विद्यार्थियों को बेलारूस के राष्ट्रपति का विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ, जिसने उनकी जिंदगी को नई दिशा दे दी। पिछले अगस्त में लोनावला के इस स्कूल के 24 विद्यार्थी और दो शिक्षक बेलारूस सरकार के खर्च पर वहाँ की यात्रा पर गए। विदेश जाने का यह पहला अवसर मिलने पर बच्चों के चेहरे पर उत्साह और उमंग साफ झलक रही थी। रवाना होने से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। यह 11 दिवसीय दौरा बच्चों के लिए अविस्मरणीय साबित हुआ। उन्होंने नेशनल चिल्ड्रन सेंटर ‘ज़ुब्रेनोंक’ में रहकर बेलारूस की संस्कृति, प्रकृति और मेहमाननवाज़ी का अनुभव किया। बच्चों ने राजधानी मिन्स्क का भ्रमण किया, द्वितीय विश्वयुद्ध स्मारक देखा और ऐतिहासिक मिर कैसल भी देखा। कैंप में भारतीय और बेलारूसी बच्चों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक गतिविधियाँ और स्वास्थ्यवर्धक अनुभव कराए गए। ऑक्सीजन कॉकटेल और मसाज थेरपी जैसे नए अनुभव बच्चों के लिए बेहद रोमांचक रहे। इन विद्यार्थियों को भाषा की बाधा दूर करने हेतु बेलारूस स्टेट यूनिवर्सिटी के अनुवादक लगातार उनके साथ रहे। इस यात्रा पर गई हुई 15 वर्षीय छात्रा अंजलि ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि , “यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सफर रहा है। बेलारूस की सुंदरता और यहाँ के लोगों का अपनापन मैं कभी नहीं भूलूँगी। इस अनुभव को मैं अपने दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करुँगी।” लोनावला के ये बच्चे सुरक्षित मुंबई लौटे और फिर समर्पक अनाथाश्रम पहुँचे। हाथों में स्मृति चिह्न और दिलों में यादगार अनुभव लेकर उनके चेहरे खुशी से दमक रहे थे।



