देश के इस राज्य में घातक ‘अफ्रीकी स्वाइन फीवर’ का प्रकोप, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

पिछले दस वर्षों की तस्वीर उठाकर देखें तो पता चलता है कि दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। कोरोनावायरस का खतरा हो, बर्ड फ्लू या ब्लैक फंगस के मामले, इन सभी ने स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भारतीय आबादी पर भी इन बीमारियों का गंभीर रूप से असर देखा गया। इस साल मई-जून के महीनों में जहां कोरोना की एक हल्की लहर ने लोगों को डराया वहीं पिछले कुछ महीनों में केरल में ब्रेन ईटिंग अमीबा के रोगियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ये सभी स्थितियां विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाती रही हैं। ऐसे ही एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने अरुणाचल में एक और खतरनाक रोग के बढ़ते मामलों को लेकर लोगों को सावधान किया है। खबरों के मुताबिक पश्चिम सियांग जिले के कई हिस्सों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। इस रोग को लेकर अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को सावधान करते हुए बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले के विभिन्न स्थानों से अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) का प्रकोप सामने आया है। पश्चिम सियांग के जिला मजिस्ट्रेट लीयी बागरा ने गुरुवार को कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने जिले के बाहर से सूअरों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा प्रशासन ने सूअर का मांस बेचने वाले कसाईयों को पशु चिकित्सा अधिकारी से निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश दिया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने की भी चेतावनी दी गई है।गौरतलब है कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर एएसएफ वायरस के कारण होता है, सुअरों से इस रोग के प्रसार का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कहती है, अफ्रीकी स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली सूअरों में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जिसकी मृत्यु दर 100% तक देखी जाती रही है। वैसे तो यह मानव स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरा वाला नहीं है, लेकिन सूअरों की आबादी और कृषि अर्थव्यवस्था पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। यह वायरस पर्यावरण में अत्यधिक प्रतिरोधी है, जिसका अर्थ है कि यह कपड़ों, जूतों, पहियों और अन्य सामग्रियों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है। सूअर के मांस के सेवन से इससे इंसानों में रोग फैलने का जोखिम रहता है।



