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भुज में सेना के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मनाया विजयादशमी समारोह, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का किया जिक्र

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को गुजरात के कच्छ जिले के भुज पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय सेना के विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने सैनिकों को संबोधित किया और कहा कि विजयादशमी का पर्व सत्य पर असत्य, धर्म पर अधर्म और अच्छे पर बुराई की जीत का प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं इस पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मुझे सौभाग्य है कि आज मैं भुज और कच्छ की इस पवित्र धरती पर अपने परिवार यानी सैनिकों के बीच मौजूद हूं।’ उन्होंने भुज और कच्छ की धरती को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक भावना और साहस की गाथा बताया। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘चाहे 1971 का युद्ध हो या 1999 का करगिल युद्ध, कच्छ की सीमाओं ने हमेशा हमारे वीर जवानों की बहादुरी देखी है। यह वही धरती है जिसने सदियों से प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मनों के हमलों का सामना किया है।’ रक्षा मंत्री ने सैनिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते। उन्होंने कहा, ‘युद्ध जीते जाते हैं मनोबल, अनुशासन और सतत तैयारी से। इसलिए मैं आपसे कहता हूं कि नई तकनीक अपनाइए, रोजाना प्रशिक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए और हर स्थिति के लिए तैयार रहिए। आज के समय में वही सेना अजेय होती है, जो लगातार सीखती है और खुद को नए बदलावों के अनुसार ढालती है।’ उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सैनिकों के कल्याण और देश की रक्षा के लिए केंद्र सरकार हर जरूरी कदम उठाने में कभी पीछे नहीं हटेगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र
भाषण में उन्होंने हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख किया और कहा, ‘इस अभियान में हमारी सेना, नौसेना, वायुसेना और सीमा सुरक्षा बल, सबने मिलकर चमत्कारिक काम किया। नौसेना और तटरक्षक बल भी पूरी तरह तैनात रहे। इस अभियान में हमने हनुमानजी के आदर्शों का पालन किया। हमारे जवानों को आतंकियों ने मारा था, लेकिन हमने केवल आतंकियों के ठिकानों पर ही हमला किया।’

रक्षा मंत्री का सैनिकों से सीधा संवाद
इस समारोह के बाद रक्षा मंत्री ने भुज में सैनिकों से सीधे बातचीत भी की। उन्होंने उनके साहस और समर्पण की सराहना की और उन्हें आश्वस्त किया कि राष्ट्र हमेशा उनके साथ खड़ा है।

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