रूस के हवाई क्षेत्र से आने वाली चीनी एयरलाइंस पर पाबंदी लगा सकता है US, ड्रैगन के इस ‘फायदे’ से खफा

टैरिफ वॉर के बीच अमेरिका और चीन में एक और टकराव हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में एक प्रस्ताव दिया था कि चीन की एयरलाइंस को रूस के ऊपर से होकर अमेरिका आने-जाने वाली उड़ानों पर प्रतिबंधित किया जाए। जिसके बाद अब चीन की सबसे बड़ी सरकारी एयरलाइनों ने अमेरिकी प्रस्ताव पर पलटवार किया है। दरअसल, प्रस्ताव में अमेरिकी पक्ष ने कहा कि ऐसी उड़ानें चीनी एयरलाइनों को अमेरिकी एयरलाइनों की तुलना में अनुचित लागत लाभ देती हैं, जो रूसी हवाई क्षेत्र से होकर नहीं जा सकतीं। रूसी एयरस्पेस को लेकर अमेरिका ने कहा कि रूस के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने से चीनी एयरलाइंस को उड़ान का समय कम करने और ईंधन की बचत का फायदा मिलता है।
2022 में रूस ने बंद किया था हवाई क्षेत्र
मालूम हो कि यूक्रेन पर रूस के हमले के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में मास्को ने 2022 में अमेरिकी एयरलाइनों और अधिकांश यूरोपीय एयरलाइनों के लिए रूसी हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। हालांकि चीनी एयरलाइंस पर इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं किया था। इधर, एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न उन छह चीनी एयरलाइनों में शामिल हैं, जिन्होंने पिछले हफ्ते चीनी एयरलाइनों द्वारा ऐसी उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावित आदेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। चाइना ईस्टर्न ने इस हफ्ते अमेरिकी परिवहन विभाग को दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंध “जनहित को नुकसान पहुंचाएगा” और चीन और अमेरिका दोनों के “यात्रियों को असुविधा” पहुंचाएगा। अतिरिक्त उड़ान समय के परिणामस्वरूप लागत और हवाई किराए में वृद्धि होगी, जिससे सभी यात्रियों पर बोझ बढ़ेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय ने भी दिया था बयान
चाइना सदर्न ने चेतावनी दी है कि रूसी हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से हजारों यात्रियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। एयर चाइना ने कहा कि उसका अनुमान है कि अगर यह प्रतिबंध थैंक्सगिविंग और क्रिसमस के सीजन में लागू होता है, तो कम से कम 4400 यात्री प्रभावित होंगे। पिछले हफ्ते चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी प्रस्तावित प्रतिबंध पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कदम दुनिया भर के यात्रियों के लिए “दंडनीय” होगा।



