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शुभमन गिल को बाहर करना गावस्कर पर श्रीकांत को तरजीह देने जैसा? इस पूर्व क्रिकेटर ने BCCI पर उठाए सवाल

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम के चयन के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज और टी20 के उपकप्तान शुभमन गिल को बाहर किए जाने के फैसले ने क्रिकेट जगत में तीखी बहस छेड़ दी है। अब इस फैसले पर पूर्व भारतीय बल्लेबाज और भारतीय महिला टीम के पूर्व कोच डब्ल्यूवी रमन ने चयनकर्ताओं को आड़े हाथों लिया है। अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति ने 15 सदस्यीय टीम में शुभमन गिल को जगह नहीं दी, जबकि वे लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे हैं। इस फैसले को लेकर डब्ल्यूवी रमन ने कहा कि गिल को किसी बड़ी गलती या खराब प्रदर्शन के कारण बाहर नहीं किया गया, बल्कि टीम कॉम्बिनेशन की वजह से उन्हें ‘बलि का बकरा’ बनाया गया।
‘गावस्कर बनाम श्रीकांत’ की तुलना
डब्ल्यूवी रमन ने इस फैसले की तुलना करते हुए कहा, ‘यह ऐसा ही है जैसे टी20 फॉर्मेट में सुनील गावस्कर के बजाय कृष्णमाचारी श्रीकांत को चुनना। हम सभी जानते हैं कि किसका स्तर क्या है, लेकिन टी20 क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजों को प्राथमिकता दी जाती है।’ उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में आक्रामकता अहम फैक्टर बन चुकी है और गिल की तुलना में कुछ अन्य बल्लेबाज स्वभाविक रूप से ज्यादा आक्रामक हैं। रमन ने यह भी सवाल उठाया कि जब शुभमन गिल को टीम से बाहर ही करना था, तो उन्हें टी20 का उपकप्तान बनाने की जरूरत क्या थी। उनके मुताबिक, टीम में पहले से ही ऐसे कई खिलाड़ी मौजूद थे जो टी20 फॉर्मेट के लिए ज्यादा उपयुक्त थे। हाल ही में इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से पहले शुभमन गिल ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक में बदलाव करते हुए ज्यादा सीधे बल्ले से खेलना शुरू किया था। हालांकि रमन का मानना है कि इस तकनीकी बदलाव का उनके टी20 प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रोहित शर्मा भी सीधे बल्ले से खेलते हैं, लेकिन इससे उनकी हिटिंग क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। डब्ल्यूवी रमन ने शुभमन गिल को इस फैसले को दिल से न लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं उनका कोच होता तो उनसे कहता कि क्रिकेटर की जिंदगी में भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं होती। यह फैसला टीम संयोजन को ध्यान में रखकर लिया गया है और गिल को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह अब कमतर खिलाड़ी बन गए हैं।’
डब्ल्यूवी रमन ने इस फैसले की तुलना करते हुए कहा, ‘यह ऐसा ही है जैसे टी20 फॉर्मेट में सुनील गावस्कर के बजाय कृष्णमाचारी श्रीकांत को चुनना। हम सभी जानते हैं कि किसका स्तर क्या है, लेकिन टी20 क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजों को प्राथमिकता दी जाती है।’ उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में आक्रामकता अहम फैक्टर बन चुकी है और गिल की तुलना में कुछ अन्य बल्लेबाज स्वभाविक रूप से ज्यादा आक्रामक हैं। रमन ने यह भी सवाल उठाया कि जब शुभमन गिल को टीम से बाहर ही करना था, तो उन्हें टी20 का उपकप्तान बनाने की जरूरत क्या थी। उनके मुताबिक, टीम में पहले से ही ऐसे कई खिलाड़ी मौजूद थे जो टी20 फॉर्मेट के लिए ज्यादा उपयुक्त थे। हाल ही में इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से पहले शुभमन गिल ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक में बदलाव करते हुए ज्यादा सीधे बल्ले से खेलना शुरू किया था। हालांकि रमन का मानना है कि इस तकनीकी बदलाव का उनके टी20 प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रोहित शर्मा भी सीधे बल्ले से खेलते हैं, लेकिन इससे उनकी हिटिंग क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। डब्ल्यूवी रमन ने शुभमन गिल को इस फैसले को दिल से न लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं उनका कोच होता तो उनसे कहता कि क्रिकेटर की जिंदगी में भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं होती। यह फैसला टीम संयोजन को ध्यान में रखकर लिया गया है और गिल को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह अब कमतर खिलाड़ी बन गए हैं।’
इन खिलाड़ियों को तरजीह
बीसीसीआई ने गिल और जितेश शर्मा को बाहर कर रिंकू सिंह और ईशान किशन जैसे बल्लेबाजों को मौका दिया है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि चयनकर्ता टी20 वर्ल्ड कप में ज्यादा आक्रामक बल्लेबाजी लाइनअप के साथ उतरना चाहते हैं।
बीसीसीआई ने गिल और जितेश शर्मा को बाहर कर रिंकू सिंह और ईशान किशन जैसे बल्लेबाजों को मौका दिया है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि चयनकर्ता टी20 वर्ल्ड कप में ज्यादा आक्रामक बल्लेबाजी लाइनअप के साथ उतरना चाहते हैं।



