लग्जरी कार खरीददारों में ईवी का हो रहा मोहभंग, पारंपरिक इंजन वाले वाहनों की बढ़ रही मांग

देश में जीएसटी बदलावों का असर ऑटो इंडस्ट्री में साफ दिख रहा है। दरअसल लग्जरी कार खरीददारों में ईवी गाड़ियों का मोहभंग हो रहा है और लोग फिर से पारंपरिक इंजन वाली गाड़ियों को खरीद रहे हैं। इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, जीएसटी 2.0 के दौर में लग्जरी कार सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में तीन फीसदी की गिरावट आई है। इसकी वजह टोटल कोस्ट ऑफ ऑनरशिप को बताया जा रहा है।
जीएसटी दरों में बदलाव का दिखा असर
गाड़ियों के बड़े बाजार में भी पारंपरिक इंजन यानी इंटरनल कम्बशन इंजन की खरीद बढ़ रही है, लेकिन लग्जरी वाहनों में ये बदलाव ज्यादा देखा जा रहा है। बीते साल सितंबर में जीएसटी की दरों में बदलाव हुआ है। इस बदलाव के तहत 1200 सीसी से कम और 4000 एमएम से कम लंबी पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी गाड़ियों और 1500 सीसी की डीजल गाड़ियों पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ 1200 सीसी से ज्यादा और 4000 एमएम से लंबी गाड़ियों पर जीएसटी 15-22 प्रतिशत के बीच रखा गया है।
क्या कहते हैं ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गज
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ संतोष अय्यर का कहना है, ‘अगर मैं अक्तूबर और नवंबर (2025) को देखूं, तो मध्यम और बजट वाहनों के साथ-साथ लग्जरी सेगमेंट में भी ईवी की बिक्री में 2 से 3 प्रतिशत की गिरावट हुई है, क्योंकि पारंपरिक इंजन वाले वाहनों का TCO (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप) ईवी की तुलना में काफी बेहतर है। इसलिए लोग फिर से पारंपरिक इंजन वाले वाहनों का रुख कर रहे हैं। बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा, जीएसटी 2.0 ने हमारे पारंपरिक इंजन वाले वाहनों के पोर्टफोलियो को और अधिक आकर्षक बनाया है। हम ईवी की मांग में भी मजबूत और लगातार गति देख रहे हैं। आज ग्राहक सिर्फ कीमत से प्रभावित नहीं होते हैं। वे कम संचालन लागत और भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी को महत्व देते हैं।’



