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क्या आप भी ‘बर्नआउट’ का शिकार हैं? वर्कप्लेस के तनाव से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और वर्कप्लेस पर बढ़ता काम का दबाव, ये दो ऐसी चुनौतियां हैं जो हमें लगातार घेरे रहती हैं। इसी के चलते, बहुत से लोग एक गंभीर समस्या का शिकार हो रहे हैं, जिसे हम ‘बर्नआउट’ कहते हैं। यह सिर्फ काम का थकान नहीं, बल्कि एक ऐसी मानसिक और शारीरिक थकावट की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति खुद को पूरी तरह से खाली और निरुत्साहित महसूस करता है। बर्नआउट एक गंभीर मानसिक और शारीरिक थकावट की स्थिति है, जो लंबे समय तक काम के अत्यधिक दबाव या तनाव के कारण होती है। बर्नआउट के शिकार व्यक्ति को लगातार तनाव, अत्यधिक थकान और प्रेरणा की सकारात्मक उम्मीद की गहरी कमी महसूस होती है। यह स्थिति न सिर्फ हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि धीरे-धीरे हमारे मानसिक स्वास्थ्य और निजी रिश्तों को भी नुकसान पहुंचाने लगती है। अगर आप भी खुद को लगातार थका हुआ, निराश और अपने काम से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि यह बर्नआउट के संकेत हो सकते हैं। ज्यादातर यह समस्या आपके कार्यस्थल पर काम के दबाव की वजह से होता है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाकर बर्नआउट से बच सकते हैं। आइए इस लेख में इससे बचने के उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
बर्नआउट का एक बड़ा कारण है अनियोजित कार्य और लगातार काम करना है। इससे बचने का तरीका बहुत सरल है कि आप अपने दिन की शुरुआत प्राथमिकताओं की सूची बनाकर करें। हर 60-90 मिनट में 5-10 मिनट का ब्रेक लें, जिसमें गहरी सांस लें, टहलें, या पानी पिएं। पोमोडोरो तकनीक (25 मिनट काम, 5 मिनट ब्रेक) समय प्रबंधन में मदद करती है। इससे दिमाग हल्का रहता है और तनाव को कम करता है।
वर्क-लाइफ बैलेंस बनाएं
वर्कप्लेस का तनाव तब बढ़ता है, जब निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बिगड़ जाता है। ऑफिस का काम घर न लाएं और निजी समय में परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताएं। ऑफिस के बाद डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं, यानी मोबाइल और ईमेल से दूरी बनाएं। इस समय में अपने पंसंदीदा काम करें जैसे पेंटिंग, बागवानी, या किताब पढ़ना तनाव को कम करते हैं।
वर्कप्लेस का तनाव तब बढ़ता है, जब निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बिगड़ जाता है। ऑफिस का काम घर न लाएं और निजी समय में परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताएं। ऑफिस के बाद डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं, यानी मोबाइल और ईमेल से दूरी बनाएं। इस समय में अपने पंसंदीदा काम करें जैसे पेंटिंग, बागवानी, या किताब पढ़ना तनाव को कम करते हैं।

नियमित व्यायाम, जैसे योग, सैर, या जिम, तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता है और एंडोर्फिन (खुशी का हार्मोन) को बढ़ाता है। रोजाना 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि बर्नआउट से बचाने में मदद करती है। साथ ही, 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।
माइंडफुलनेस और सहायता लें
माइंडफुलनेस तकनीक, जैसे ध्यान, प्राणायाम, या गहरी सांस लेना, दिमाग को शांत रखता है। रोजाना 10 मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है। अगर बर्नआउट के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, उदासी, या थकान बढ़े, तो सहकर्मियों, बॉस, या परिवार से खुलकर बात करें। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की सलाह लें। वर्कप्लेस में तनाव की बात को छिपाने के बजाय समाधान खोजें।
माइंडफुलनेस तकनीक, जैसे ध्यान, प्राणायाम, या गहरी सांस लेना, दिमाग को शांत रखता है। रोजाना 10 मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है। अगर बर्नआउट के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, उदासी, या थकान बढ़े, तो सहकर्मियों, बॉस, या परिवार से खुलकर बात करें। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की सलाह लें। वर्कप्लेस में तनाव की बात को छिपाने के बजाय समाधान खोजें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।



