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भारतीय वनडे टीम में जगह मिलने पर आया आयुष बदोनी का बयान, बताया किस चीज का मिला फायदा

आयुष बदोनी को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम में जगह मिलने पर विवाद हुआ था। टीम प्रबंधन के इस फैसले पर कई पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने सवाल खड़े किए थे। बदोनी को वाशिंगटन सुंदर के चोटिल होने के कारण टीम में जगह मिली थी। बदोनी का कहना है कि कुछ वर्ष पहले गेंदबाजी करने के उनके फैसले ने उन्हें ऑलराउंडर के रूप में उभरने में मदद की। भारत और न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में रविवार को तीसरा वनडे मुकाबला खेला जाएगा। इससे पहले बदोनी ने बीसीसीआई टीवी से कहा, मैं दिल्ली टीम के साथ था, मैं वहां कप्तान था और अगले दिन हमारा विदर्भ के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच था। तभी मुझे इसके (टीम में शामिल होने) के बारे में पता चला। प्रियांश मेरा रूममेट था, इसलिए मैंने उसे बताया कि ऐसा हो सकता है और मैं जा रहा हूं, तो शायद तुम कप्तान बन जाओगे। यह बहुत अच्छा अहसास था और मैं बहुत आभारी और खुश हूं कि मुझे यह अवसर मिला। जब बदोनी से पूछा गया कि उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों में से किससे बात की, तो उन्होंने कहा, मुझे देर रात फोन आया, इसलिए मैं उन्हें बता नहीं सका। सुबह इसकी घोषणा हुई, तभी उन्हें पता चला और वे भी बहुत खुश और गौरवान्वित थे। सभी कोचों और खिलाड़ियों ने मेरा स्वागत किया और मुझे यह बहुत अच्छा लगा। मैं उनमें से ज्यादातर के साथ और उनके खिलाफ खेल चुका हूं, इसलिए सभी से दोबारा मिलना बहुत अच्छा लगा।
ऑलराउंडर बनने का मिला फायदा
बदोनी ने यह भी बताया कि वह पहले सिर्फ बल्लेबाज थे, लेकिन दो साल पहले उन्होंने गेंदबाजी शुरू की और ऑलराउंडर के रूप में उनके इस बदलाव ने उन्हें पहली बार भारतीय टीम में जगह दिलाने में मदद की। उन्होंने कहा, तैयारी बिल्कुल स्पष्ट थी। पहले मैं बल्लेबाजी करता था, लेकिन पिछले दो वर्षों से मैं अपनी गेंदबाजी पर काफी ध्यान दे रहा हूं। मुझे हमेशा लगता है कि मैं विकेट ले सकता हूं और अपनी गेंदबाजी से टीम में योगदान दे सकता हूं। इसलिए मुझे ऑलराउंडर होने का फायदा मिला। मैंने दिल्ली के लिए काफी गेंदबाजी की है, विकेट लिए हैं और इसका मुझे बहुत लाभ मिला है।
बदोनी ने यह भी बताया कि वह पहले सिर्फ बल्लेबाज थे, लेकिन दो साल पहले उन्होंने गेंदबाजी शुरू की और ऑलराउंडर के रूप में उनके इस बदलाव ने उन्हें पहली बार भारतीय टीम में जगह दिलाने में मदद की। उन्होंने कहा, तैयारी बिल्कुल स्पष्ट थी। पहले मैं बल्लेबाजी करता था, लेकिन पिछले दो वर्षों से मैं अपनी गेंदबाजी पर काफी ध्यान दे रहा हूं। मुझे हमेशा लगता है कि मैं विकेट ले सकता हूं और अपनी गेंदबाजी से टीम में योगदान दे सकता हूं। इसलिए मुझे ऑलराउंडर होने का फायदा मिला। मैंने दिल्ली के लिए काफी गेंदबाजी की है, विकेट लिए हैं और इसका मुझे बहुत लाभ मिला है।
बदोनी बोले- सीनियर खिलाड़ियों से सीखता हूं
टीम के सीनियर खिलाड़ियों के साथ बिताए समय के बारे में बात करते हुए बदोनी ने कहा कि उन्हें घरेलू क्रिकेट हो या फ्रेंचाइजी क्रिकेट, उनमें से कई के साथ या उनके खिलाफ खेलने का अनुभव है और वह हमेशा उनसे सीखने की पूरी कोशिश करते हैं। बदोनी ने कहा, हमारी टीम के कई सीनियर खिलाड़ी एक तरह से दिग्गज हैं, इसलिए मैं बल्लेबाजी या गेंदबाजी करते समय उनसे सीखने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है कि इससे मेरे खेल में निखार आता है और मैं जितना हो सके उतना सीखने का प्रयास करता हूं। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके साथ मुझे खूब मजा आता है और अच्छा समय बीतता है। मैं हर्षित को जानता हूं क्योंकि वह दिल्ली के लिए खेलते हैं। अर्शदीप और श्रेयस के साथ भी मुझे खूब मजा आता है। उनके साथ रहना बहुत आनंददायक होता है।
टीम के सीनियर खिलाड़ियों के साथ बिताए समय के बारे में बात करते हुए बदोनी ने कहा कि उन्हें घरेलू क्रिकेट हो या फ्रेंचाइजी क्रिकेट, उनमें से कई के साथ या उनके खिलाफ खेलने का अनुभव है और वह हमेशा उनसे सीखने की पूरी कोशिश करते हैं। बदोनी ने कहा, हमारी टीम के कई सीनियर खिलाड़ी एक तरह से दिग्गज हैं, इसलिए मैं बल्लेबाजी या गेंदबाजी करते समय उनसे सीखने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है कि इससे मेरे खेल में निखार आता है और मैं जितना हो सके उतना सीखने का प्रयास करता हूं। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके साथ मुझे खूब मजा आता है और अच्छा समय बीतता है। मैं हर्षित को जानता हूं क्योंकि वह दिल्ली के लिए खेलते हैं। अर्शदीप और श्रेयस के साथ भी मुझे खूब मजा आता है। उनके साथ रहना बहुत आनंददायक होता है।



