भारतीयों में बढ़ रहा ‘साइलेंट हेल्थ रिस्क’, इन बीमारियों को लेकर अलर्ट

पश्चिम एशिया में जारी जंग दुनियाभर के लिए कई तरह की मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की डिमांड और सप्लाई बिगड़ने लग गई है। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव की आंच भारत में भी अब स्पष्ट तौर पर महसूस की जाने लगी है। सरकारें भले ही दावा करती रहें कि देश में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है, पर गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारें कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। मसलन देश ‘एलपीजी क्राइसेस’ का सामना कर रहा है, जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत को लेकर भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका जंग से उपजी परिस्थितियों ने लोगों के सामने स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विशेषतौर पर भारत में लोगों को फेफड़ों की समस्याओं को लेकर अलर्ट किया जा रहा है। अब आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि ईरान-अमेरिका के बीच जारी विवाद, सुदूर भारत में बैठे लोगों की सेहत के लिए कैसे संकट पैदा करने वाला हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं

देश के अलग-अलग हिस्सों से प्राप्त हो रही खबरों से साफ होता है कि लोग गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं। घंटों लाइन मे लगे रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है, मांग और सप्लाई में फिलहाल भारी कमी देखी जा रही है। लिहाजा बड़ी संख्या में लोग फिर से खाना पकाने के पारंपरिक तरीके लकड़ी-कोयले और उपलों की ओर बढ़ रहे हैं।
- एलपीजी की कमी के कारण लाखों परिवार बायोमास ईंधनों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो रहे हैं, इसी स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं।
- दो दशकों पहले का फिर से लौटता दौर इनडोर प्रदूषण और इसके कारण सांस-फेफड़ों की समस्याओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है।
- विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर एलपीजी में कमी जारी रहती है और बायोमास ईंधनों का उपयोग फिर से बढ़ता है तो इसके परिणामस्वरूप लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का संकट फिर से बढ़ सकता है। बायोमास ईंधन के इस्तेमाल को कम करने और इसके विकल्प के तौर पर एलपीजी गैस के उपयोग के बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1 मई 2016 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को धुआं-मुक्त रसोई देना था ताकि उनमें सांस से जुड़ी समस्याओं के जोखिमों को कम किया जा सके। हालांकि अब फिर से मजबूरी में ही सही बायोमास ईंधनों के उपयोग की तरफ लोगों का फिर से बढ़ना सेहत के लिए खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।
- घर के अंदर खाना पकाने के लिए बायोमास ईंधन (लकड़ी, गोबर, फसलों के अवशेष) जलाने से होने इनडोर वायु प्रदूषण का खतरा होता है।
- इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिसका महिलाओं और बच्चों पर सीधा असर पड़ता है।
- बायोमास ईंधन और इससे होने वाले प्रदूषण के कारण श्वसन संक्रमण, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हृदय रोग, मोतियाबिंद जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
श्वसन रोगों का बढ़ता खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बायोमास ईंधन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कण निकलते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब होती है। खाना पकाने के लिए इसके इस्तेमाल से इनडोर प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। ईंधन से निकलने वाले धुंआ में हानिकारक गैसों के साथ सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के माध्यम से फेफड़ों में जा सकते हैं। इससे श्वसन संबंधी गंभीर रोग, फेफड़ों को गंभीर क्षति होने और कैंसर तक का जोखिम बढ़ जाता है।
- बायोमास ईंधन के नियमित इस्तेमाल को सीओपीडी के जोखिम से जोड़कर देखा जाता रहा है।
- एक अध्ययन में पाया गया कि इस तरह के ईंधन का उपयोग करने वाले 91% प्रतिभागियों में श्वसन रोगों का उच्च जोखिम था।
- हालांकि जब इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) का उपयोग करना शुरू कर दिया तो श्वसन समस्याओं का खतरा भी धीरे-धीरे कम होने लगा।
- एलपीजी उपयोगकर्ताओं की तुलना में बायोमास उपयोगकर्ताओं में सांस फूलने, घरघराहट और क्रॉनिक खांसी का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
फेफड़ों के अलावा कई अन्य समस्याओं का भी खतरा
लकड़ी-उपलों को जलाने से होने वाला प्रदूषण फेफड़ों की सेहत के लिए तो खतरनाक है ही, साथ ही इससे कई अन्य तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
- बायोमास ईंधन और इसके धुएं के संपर्क में रहना गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। इससे जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने, मृत शिशु के जन्म और शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी का खतरा हो सकता है।
- धुएं के संपर्क में आने से मोतियाबिंद, आंखों में जलन और नाक में जलन की दिक्कतें ज्यादा देखी जाती हैं।
- धुएं में पॉलीसाइक्लिक कार्बनिक पदार्थ हो सकते हैं। इसमें बेंजोपाइरीन जैसे कैंसरकारी पदार्थ भी शामिल हैं, जिससे कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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