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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार की तैयारी, एमएसएमई समेत कई क्षेत्रों को राहत देने पर फोकस

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबा चलने की आशंका के बीच केंद्र सरकार देश की अर्थव्यवस्था के कमजोर क्षेत्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त पैकेज पर विचार कर रही है। सरकार की प्राथमिकता एमएसएमई सेक्टर को सहारा देना और महंगाई को नियंत्रण में रखना है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में सरकार को एक तरफ प्रभावित सेक्टर और कमजोर वर्गों को तत्काल राहत देनी होगी, वहीं दूसरी तरफ दीर्घकालिक जरूरतों के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन भी करना होगा। सरकार पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर चुकी है, जबकि डीजल को पूरी तरह शुल्क मुक्त कर दिया गया है। दरअसल, अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल आया, जो करीब 100 डॉलर के आसपास बनी हुई है। ऐसे में भारत पर सीधा असर पड़ना तय है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है।

लागत के दबाव से निर्यात प्रभावित
निर्यात क्षेत्र को राहत देने के लिए सरकार ने 497 करोड़ की रिलीफ योजना शुरू की है। इसका मकसद माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों, बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े जोखिमों से जूझ रहे निर्यातकों को सहारा देना है। निर्यात उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट योजना को भी बहाल कर दिया है, ताकि निर्यातकों को लागत के दबाव से कुछ राहत मिल सके। पश्चिम एशिया तनाव का असर शिपिंग रूट्स पर भी साफ दिख रहा है। होर्मुज के आसपास सुरक्षा जोखिम बढ़ने से जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है और आपूर्ति शृंखला में अनिश्चितता पैदा हो रही है।

उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक, खरीफ सीजन में नहीं होगी कमी
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद देश में उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी उर्वरक संस्था इफको का दावा है कि किसानों को आने वाले खरीफ सीजन में किसी भी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस संकट से उर्वरक उत्पादन में 6 से 9 लाख टन तक की कमी आ सकती है। सरकार आपातकालीन उपायों की योजना बना रही है, जिसमें मोरक्को जैसे देशों और अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से आयात के जरिये किसी भी संभावित कमी को पूरा करना शामिल है। इफको के आंवला (बरेली) संयंत्र के सीनियर जनरल मैनेजर सत्यजीत प्रधान ने बताया कि गैस आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई, जिससे उर्वरक उत्पादन और वितरण दोनों सुचारू रूप से चल रहे हैं। उन्होंने कहा, मौजूदा हालात के बावजूद कंपनी की उत्पादन और मार्केटिंग गतिविधियां सामान्य बनी हुई हैं।

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