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चंद मिनटों में तेज व्यायाम से घटेगा डायबिटीज और दिल के दौरे का खतरा, डिमेंशिया जोखिम भी 63% होगा कम

हर दिन केवल कुछ मिनट तक सांस फूलने वाली तेज शारीरिक गतिविधि दिल की बीमारी, डिमेंशिया, टाइप-2 डायबिटीज समेत आठ बड़ी बीमारियों के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकता है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस बड़े अध्ययन में पाया गया कि व्यायाम की मात्रा के साथ-साथ उसकी तीव्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अध्ययन यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के तहत किया गया, जिसमें करीब 96,000 लोगों के डाटा का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों ने एक सप्ताह तक कलाई पर एक्सेलेरोमीटर डिवाइस पहना, जिससे उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों का सटीक रिकॉर्ड मिला, खासकर वे छोटे-छोटे पल जब वे तेज गति से सक्रिय होते हैं। इसके बाद शोधकर्ताओं ने लगभग सात वर्षों तक इन लोगों के स्वास्थ्य परिणामों को ट्रैक किया और देखा कि कितने लोगों में हृदय रोग, अनियमित धड़कन, डायबिटीज, डिमेंशिया, क्रॉनिक किडनी और लीवर रोग तथा इंफ्लेमेटरी बीमारियां विकसित हुईं। अध्ययन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि जिन लोगों की कुल गतिविधि में तेज गतिविधि का हिस्सा अधिक था, उनमें सभी प्रमुख बीमारियों का जोखिम कम था। जिन लोगों ने बिल्कुल भी तेज गतिविधि नहीं की, उनके मुकाबले अधिक सक्रिय समूह में डिमेंशिया का खतरा 63 प्रतिशत तक कम पाया गया, टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम 60 प्रतिशत तक घटा और मृत्यु का कुल जोखिम 46 प्रतिशत तक कम रहा।

शरीर व मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव
चीन के सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिनशुए शेन के अनुसार तेज शारीरिक गतिविधि शरीर में ऐसे जैविक परिवर्तन उत्पन्न करती है जो सामान्य गतिविधि से संभव नहीं होते। इस दौरान हृदय अधिक कुशलता से काम करता है, रक्त वाहिकाएं अधिक लचीली बनती हैं और शरीर ऑक्सीजन का बेहतर उपयोग करने लगता है। साथ ही यह गतिविधि शरीर में सूजन को कम करती है, जिससे आर्थराइटिस और सोरायसिस जैसी इंफ्लेमेटरी बीमारियों के जोखिम में कमी आती है।

रोजमर्रा की जिंदगी में  छोटे बदलाव ही पर्याप्त
शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि इसके लिए अलग से समय निकालकर जिम जाने की जरूरत नहीं है। दैनिक जीवन में किए जाने वाले छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सीढ़ियां तेजी से चढ़ना, किसी काम के लिए जल्दी-जल्दी चलना या बस पकड़ने के लिए दौड़ना भी उतने ही प्रभावी हो सकते हैं। सप्ताह में कुल 15 से 20 मिनट की ऐसी गतिविधि, जो रोज कुछ मिनटों में पूरी हो जाती है, स्वास्थ्य पर बड़ा सकारात्मक असर डाल सकती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि तेज गतिविधि हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होती। खासकर बुजुर्गों-बीमारों को अपने चिकित्सक की सलाह पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

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