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‘शराब पीने वालों के साथ काम नहीं करता’, सलमान खान के साथ फिल्म न करने पर विवेक वासवानी ने कही ये बात

अभिनेता, निर्माता और लेखक विवेक वासवानी ने सुपरस्टार सलमान खान को कई खुलासे किए हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि ‘पत्थर के फूल’ के बाद उन्होंने दोबारा क्यों सलमान खान जैसे सुपरस्टार के साथ काम नहीं किया? हालांकि, उन्होंने कुछ खास परिस्थितियों में सुपरस्टार के पेशेवर रवैये की सराहना भी की। विक्की लालवानी के साथ बातचीत में विवेक वासवानी ने डिसिप्लिन, क्रिएटिव प्रोसेस और सलमान के साथ काम करने के अपने अनुभव को लेकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें सलमान के साथ दोबारा काम करने का मन नहीं हुआ, तो वासवानी ने साफ कहा, ‘नहीं हुआ।’ उन्होंने आगे कहा कि मैं ऐसी जगह काम नहीं कर सकता, जहां शराब हो। मैं ऐसी जगह काम नहीं कर सकता, जहां लोग शराब पीते हों और अनुशासनहीनता के साथ काम करते हों। हालांकि, अगर मुझे वो सलमान मिलें जो सूरज बड़जात्या के साथ काम करते हैं, तो मैं जरूर करूंगा। क्योंकि उनके साथ सलमान पूरी तरह अनुशासित हैं, पूरी तरह से प्रोफेशनल हैं और अपना बेस्ट देते हैं। अगर मैं सलमान के साथ काम करता हूं, तो मैं उन्हें सर्वश्रेष्ठ देना चाहूंगा।

Viveck Vaswani Reveals Why He Does Not Work With Salman Khan Says I Can Not Where People Is Drinks Liquor
आदित्य चोपड़ा-संजय लीला भंसाली सलमान के नाम पर फिल्में नहीं बनाते

विवेक वासवानी ने आगे कहा कि कुछ फिल्म निर्माताओं के साथ, सलमान पूरी तरह से कंट्रोल में रहते हैं। जैसे आदित्य चोपड़ा, संजय लीला भंसाली, सूरज बड़जात्या। ये ऐसे निर्माता हैं, जो सिर्फ सलमान के नाम पर फिल्में नहीं बनाते। उन्हें उतना ही सम्मान मिलता है क्योंकि वे बहुत बड़े बैनर हैं। वे किसी भी तरह के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देते। उन्हें सलमान अभिनेता के रूप में चाहिए, न कि सलमान स्टार के रूप में। मेरा भी ये मानना है कि अगर आप कुछ बदलना चाहते हैं, तो डायरेक्टर के साथ बैठिए, अपने डायलॉग बदलिए, अपना कॉस्ट्यूम बदलिए, यह ठीक है। हस्तक्षेप करना ठीक है। लेकिन अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं है।

डिस्कशन में हिस्सा लेते थे सलमान, बदलाव के देते थे सुझाव
‘पत्थर के फूल’ को याद करते हुए विवेक ने कहा कि सलमान के पिता सलीम खान वहां मौजूद थे। उन्होंने ही स्क्रिप्ट लिखी थी। हालांकि, सलमान ने कुछ बदलाव बताए थे, लेकिन लेखक का फैसला आखिरी होता है। वह कहते थे, ‘क्या हम इसे इस तरह कर सकते हैं?’ और ये सुझाव बुरे नहीं होते थे। लेकिन जब सलीम-जावेद लिख रहे थे, तो मैंने सुना था कि वे एक शब्द भी बदलने की अनुमति नहीं देते थे। आपको एक दिग्गज के कद का सम्मान करना पड़ता है। इसीलिए वो फिल्में सफल हुईं। हालांकि, बातचीत के दौरान के जब आप उनके साथ किसी सीन पर पर बैठते थे, तो वह सोचते थे।

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