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देश को गुलामी से मुक्त करने और समाज को एकजुट करने के लिए संघ की स्थापना हुई, मोहन भागवत का बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने और हिंदू समाज में एकता की कमी को दूर करने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की थी। तेलंगाना के निजामाबाद जिले के कंदाकुर्थी गांव में ‘श्री केशव स्पूर्ति मंदिर’ के उद्घाटन के बाद संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता के लिए राजनीतिक और सशस्त्र दोनों तरह के प्रयासों में भाग लिया था।

क्या बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने महसूस किया था कि देश पर विदेशी शासन केवल बाहरी ताकत की वजह से नहीं, बल्कि समाज की कुछ कमजोरियों के कारण भी स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में एकता की कमी एक प्रमुख कारण थी, जिसे दूर करने की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ सभी के साथ सामंजस्य के साथ रहना और विविधता का सम्मान करना है। हेडगेवार चाहते थे कि समाज मजबूत, निडर और गुणवान बने। हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक बयान में कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इतिहास में अपने नाम को स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराने की इच्छा नहीं रखता, बल्कि पिछले 100 वर्षों के अपने कार्यों का पूरा श्रेय समाज को देना चाहता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस का पूरा काम इसके स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत पर आधारित है, न कि किसी की कृपा पर। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि संगठन के कार्यों में किसी की कृपा की कमी के कारण भी कभी बाधा नहीं आई।

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