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आम चुनावों के बाद अब बार एसोसिएशन का भी चुनाव नहीं लड़ सकेगी शेख हसीना की अवामी लीग, जानें क्यों

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्यों ने आगामी वार्षिक चुनाव में अवामी लीग समर्थक वकीलों को चुनाव लड़ने से रोकने का फैसला किया है। यह चुनाव 13 और 14 मई 2026 को प्रस्तावित है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह निर्णय रविवार को ढाका में आयोजित एसोसिएशन की एक असाधारण आम बैठक (EGM) में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता एससीबीए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हुमायूं कबीर मंजू ने की, जिन्हें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) समर्थक वकील माना जाता है। बैठक में करीब 300 वकील शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें अधिकांश बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी समर्थक थे।

100 सदस्यों ने क्या मांग की थी?

SCBA सचिव बैरिस्टर मोहम्मद महफुजुर रहमान मिलोन ने बताया कि करीब 100 सदस्यों ने पहले नेतृत्व से मांग की थी कि अवामी लीग समर्थक वकीलों को चुनाव से बाहर रखने पर निर्णय लिया जाए, क्योंकि पार्टी की गतिविधियों पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम, 2009 के तहत प्रतिबंध है। दरअसल पहले ही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने कहा कि आम सदस्यों की राय के आधार पर फैसला लिया गया कि अवामी लीग समर्थित सम्मिलिता आइंजीबी समन्वय परिषद और बंगबंधु अवामी आइंजीबी परिषद से जुड़े वकील या इन संगठनों के पदाधिकारी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हालांकि, मिलोन ने स्पष्ट किया कि ऐसे वकील स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। यह चुनाव SCBA के 14 कार्यकारी पदों, जिनमें अध्यक्ष और सचिव जैसे अहम पद शामिल हैं, के लिए कराया जाएगा। निर्वाचित पदाधिकारियों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा।

मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

इस बीच फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश फ्रांस में (JMBF) ने हाल के दिनों में बांग्लादेश के बार एसोसिएशन चुनावों में कथित अनियमितताओं और राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अवामी लीग समर्थक वकीलों के नामांकन रद्द किए जाने की निंदा की है। संगठन ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों, मुंशीगंज, मयमनसिंह, ठाकुरगांव, पंचगढ़, खुलना, नाराइल और सुनामगंज में पुलिस हस्तक्षेप के जरिए ऐसे वकीलों को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अवामी लीग ने संसद में पारित उस विधेयक की कड़ी आलोचना की थी, जिसके जरिए पार्टी पर प्रभावी प्रतिबंध लगा दिया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला और शर्मनाक कदम बताया था।

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