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‘दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता भारत’, कनाडाई पुलिस के बयान पर बोले पूर्व राजदूत

कनाडा में भारत के पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने कनाडाई पुलिस के ताजा बयान पर खुशी जाहिर की है। आरसीएमपी के कमिश्नर माइक ड्यूहेम ने संकेत दिया है कि भारत के खिलाफ विदेशी दमन का कोई सबूत नहीं मिला है। संजय वर्मा ने कहा कि वह इस बयान को देखकर बहुत खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों में सुधार आएगा। संजय वर्मा एक वरिष्ठ राजनयिक हैं। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में भारी गिरावट के बाद उन्हें नई दिल्ली ने वापस बुला लिया था। उस समय दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ होने का आरोप लगाया था। निज्जर को भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी घोषित किया हुआ था। एक इंटरव्यू में संजय वर्मा ने जोर देकर कहा कि किसी दूसरे देश के आंतरिक मामलों में दखल देना भारत की नीति कभी नहीं रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्नी ने हाल ही में 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा भी की थी।

तत्कालीन सरकार ने नहीं मानी थी बात
मार्क कार्नी की यात्रा के तुरंत बाद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) प्रमुख ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि मौजूदा आपराधिक आंकड़ों के आधार पर किसी विदेशी संस्था का कोई संबंध नहीं दिख रहा है। संजय वर्मा ने बताया कि जब वह उच्चायुक्त थे, तब उन्होंने भी यही बात कही थी। लेकिन उस समय की सरकार ने उनकी बातों को स्वीकार नहीं किया था। संजय वर्मा ने समझाया कि पुलिस प्रमुख ने अब इन मुद्दों को दो अलग हिस्सों में बांट दिया है। पहला हिस्सा खालिस्तानी आतंकी की हत्या की जांच से जुड़ा है। इस मामले में चार भारतीय नागरिकों के खिलाफ अदालत में केस चल रहा है। ये चारों छात्र के रूप में कनाडा गए थे और वहां की गतिविधियों में शामिल हो गए। दूसरा हिस्सा कनाडा में भारत की भूमिका पर लगे आरोपों का है। वर्मा ने कहा कि जब वह ओटावा में थे, तब भारत पर विदेशी दमन और अपराधों के बहुत आरोप लगे थे। उन्होंने हमेशा कहा कि भारत दखल नहीं देता। अब पुलिस के बयान से यह साफ हो गया है।

विदेश मंत्रालय ने भी खारिज किया था आरोप
इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कनाडा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि ट्रूडो सरकार बिना किसी सबूत के सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए भारत को बदनाम कर रही थी। अब दोनों देश अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है।

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