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NCP में सियासी खींचतान, अनुभवी नेताओं और युवा गुट के बीच फंसीं सुनेत्रा पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में इन दिनों पार्टी पर कब्जे को लेकर एक शांत लेकिन तीखी जंग चल रही है। इस विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री और पार्टी की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार हैं। बारामती उपचुनाव जीतने के बाद अब उनके सामने पार्टी के भीतर दो गुटों को संभालने की बड़ी चुनौती है।

एक पत्र के सामने आने के बाद उड़ीं खबरें
पार्टी के जानकार बताते हैं कि सुनेत्रा पवार अपने बेटे पार्थ पवार के युवा गुट और प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे जैसे अनुभवी नेताओं के बीच फंसी हुई हैं। यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा। इस पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के पदों का जिक्र नहीं किया गया था। जबकि छोटे पदाधिकारियों के पद साफ लिखे थे, इन दो बड़े नेताओं के नाम के आगे जगह खाली छोड़ दी गई थी। इस पत्र के लीक होने से पार्टी में फिर से फूट की खबरें उड़ने लगीं। हालांकि, सुनेत्रा पवार और उमेश पाटिल जैसे नेताओं ने इसे तकनीकी गलती बताया। लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह पार्थ पवार के नेतृत्व वाले युवा गुट की एक सोची-समझी चाल थी। इसका मकसद अनुभवी नेताओं को पार्टी पर पूरी तरह कब्जा करने से रोकना था।

सुनेत्रा पवार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
सुनेत्रा पवार के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती परिवार और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाना है। अगर वह दिग्गजों को किनारे करती हैं, तो पार्टी का ढांचा कमजोर हो सकता है। दूसरी चुनौती संसाधनों की कमी है। दिवंगत अजित पवार के पास वित्त मंत्रालय था, जिससे वह ग्रामीण क्षेत्रों के नेताओं को फंड दे सकते थे। सुनेत्रा के पास अभी आबकारी और खेल जैसे मंत्रालय हैं। ऐसे में जिला बैंकों और सहकारी संस्थाओं के नेताओं को अपने साथ जोड़े रखना उनके लिए मुश्किल होगा। तीसरी चुनौती शरद पवार के गुट से मिल रही टक्कर है। रोहित पवार जैसे विपक्षी नेता इस आंतरिक कलह का फायदा उठा रहे हैं। वे अफवाहें फैला रहे हैं कि अनुभवी नेता केवल अपने फायदे के लिए पवार परिवार का साथ दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सुनेत्रा पवार को जल्द ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलानी चाहिए। उन्हें अनुभवी नेताओं और युवाओं की जिम्मेदारी तय करनी होगी। साथ ही, आगामी चुनावों में भाजपा और शिंदे गुट के सामने अपनी पार्टी की सीटों की रक्षा करनी होगी। म के लिए असली परीक्षा बाहरी विरोधियों से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर शांति बनाए रखने में है। 

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