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स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता से खानपान में बदलाव, भारतीय थाली में बढ़ा मोटे अनाज का रुतबा

देश में मोटा अनाज यानी मिलेट्स जिसे श्रीअन्न भी कहा जाता है, वह अब मात्र पारंपरिक या मौसमी अनाज नहीं रह गया है। अब यह भारतीय परिवारों की थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सर्वेक्षण कंपनी लोकल सर्कल्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 70 प्रतिशत परिवार नियमित रूप से किसी ने किसी रूप से मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अपने आहार में ग्रहण कर रहे हैं। इसमें रागी, बाजरा, ज्वार सहित जौ और मक्का शामिल है। साथ ही शाम के हल्की भूख के लिए लोग मखाने, चना, कुरमुरा, भेल और  मूंगफली खाना पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि लोग मोटा अनाज स्वाद नहीं सेहत के लिए भी अपना रहे हैं। लगभग 43 प्रतिशत लोग मानते हैं, कि वे स्वास्थ्य कारणों से मोटे अनाज खाते हैं। जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने माना है क भोजन में विविधता आती है, वहीं 15 प्रतिशत ने धार्मिक उपवास और कुछ लोगोंने स्थानीय उपलब्धता की वजह से भी इनकों आहार में शामिल किया है।

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