India newsLatest news

विकसित भारत के लिए नशामुक्त भारत का संकल्प लेना जरूरी, बचेंगी करोड़ों जिंदगियां

लोगों के नशा करने का आदी होना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है। लेकिन भारत की बात करें तो यह सिर्फ सामाजिक या स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भर नहीं है। बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर मसला है। इस बुराई के खिलाफ जंग भारत की युवा शक्ति, पारिवारिक ताने-बाने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के अहम भूमिका निभा सकती है। और, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य भी यही है। नशा सिर्फ एक इंसान को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, समाज और अंतत: पूरे देश की सामूहिक ताकत को कमजोर कर देता है। युवाओं के सपनों को तोड़ता है, परिवारों को बिखेर देता है और देश के विकास की रफ्तार धीमी कर देता है। आज भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यही हमारे अमृत काल की सबसे बड़ी पूंजी है। अगर हम इस ताकत को सही दिशा देकर शिक्षा, कौशल, नए विचारों और राष्ट्र निर्माण में लगाएं, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। अगर युवा नशे की दलदल में फंस गए, तो सिर्फ एक पीढ़ी का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का नुकसान होगा। इसलिए, नशे के खिलाफ लड़ाई हर भारतीय की जिम्मेदारी है। आइये आज अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के मौके पर हम सामूहिक संकल्प लें और विकसित भारत के निर्माण के लिए नशामुक्त भारत की दिशा में कदम बढ़ाएं। 140 करोड़ देशवासियों का यही संकल्प विकसित भारत के निर्माण की सबसे मजबूत नींव बनेगा। अगर हर नागरिक सिर्फ एक व्यक्ति को नशे से दूर रखने का संकल्प ले ले, तो करोड़ों जिंदगियों को तबाह होने से बचाया जा सकेगा। मैं देश के हर नागरिक, खासकर अपने युवा साथियों से अपील करता हूं कि नशे के खिलाफ इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। अपने परिवार, अपने स्कूल, अपने दफ्तर और अपने समाज में जागरूकता फैलाएं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जागरूकता को जन-आंदोलन बनाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था या स्वास्थ्य के चश्मे से नहीं देखा है; बल्कि इसे भारत के युवाओं के भविष्य और देश की तरक्की से जुड़ा एक बेहद अहम मुद्दा माना है। प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ सरकारी कागजों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि एक जन-आंदोलन बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में नशा मुक्त भारत अभियान में करोड़ों युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया है। 15 अगस्त 2020 को शुरू हुआ यह अभियान आज एक जन-आंदोलन बन चुका है। 

महिलाएं इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत
हमारी माताएं-बहनें इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत हैं। पूरे देश में स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने समाज को जागरूक करने और परिवारों को संभालने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। नशामुक्त भारत के निर्माण में उनका योगदान अमूल्य है। इसके साथ ही, हमें उन लोगों के प्रति भी अपना नजरिया बदलना होगा जो नशे की लत से उबर चुके हैं। किसी भी इंसान को उसके अतीत से नहीं, बल्कि खुद को सुधारने के उसके प्रयासों से आंका जाना चाहिए। पुनर्वास तभी पूरी तरह सफल होगा जब समाज ऐसे लोगों को खुले दिल से अपनाए, उनका हौसला बढ़ाए और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के मौके दे।

Related Articles

Back to top button