कांग्रेस ने डीएमके को धोखा दिया
उन्होंने कहा, ‘इंडिया गठबंधन खत्म हो चुका है और दफन हो चुका है। यह कागजों पर और टेलीविजन स्क्रीन पर मौजूद हो सकता है, लेकिन वास्तविकता में इसका कोई अस्तित्व नहीं है।’ भाजपा के प्रवक्ता ने एक वीडियो बयान में कहा, ‘डीएमके ने आगामी दिनों में होने वाली ‘इंडिया अलायंस’ की बैठक में कांग्रेस के साथ शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। उसने कहा है कि कांग्रेस ने उसे धोखा दिया है।’
‘गठबंधन का कोई उद्देश्य नहीं था’
विपक्षी दलों की साझेदारी पर सवाल उठाते हुए पूनावाला ने दावा किया कि कई राज्यों में उनकी पार्टियां एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी हैं। उन्होंने पूछा, ‘इंडिया गठबंधन वास्तव में कहां मौजूद है? क्या यह पश्चिम बंगाल, पंजाब, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तराखंड या मध्य प्रदेश में एकजुट था?’ पूनावाला ने आरोप लगाया कि यह गठबंधन किसी साझा उद्देश्य के बजाय राजनीतिक अवसरवादिता से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘यह गठबंधन अवसरवादिता का एक आदर्श उदाहरण था। इसमें कोई मिशन नहीं था, केवल भ्रम, विभाजन और पदों के लिए महत्वाकांक्षा थी।’ भाजपा के प्रवक्ता ने दावा किया कि गठबंधन में शामिल पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर एकता का प्रदर्शन करते हुए राज्यों में आपस में लड़ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘केरल में कांग्रेस और वामपंथी दल राजनीतिक संघर्ष में लगे हुए थे, लेकिन दिल्ली में वह मित्रता का दावा कर रहे थे। पश्चिम बंगाल जैसे स्थानों पर वह एक-दूसरे से लड़ रहे थे, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में एकता का प्रदर्शन कर रहे थे।’ यह दावा करते हुए कि क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस पर से विश्वास खत्म हो गया है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि उसके सहयोगी अब उसे एक धोखेबाज पार्टी के रूप में देखते हैं।
उन्होंने कहा, ‘डीएमके के साथ हुए विश्वासघात के बाद सभी क्षेत्रीय दलों को यह समझ आ गया है कि कांग्रेस एक धोखेबाज पार्टी है।’ समाजवादी पार्टी का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उसने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का इरादा जताया है। उन्होंने कहा, ‘समाजवादी पार्टी पहले ही कह चुकी है कि वह उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कांग्रेस के साथ उसका कोई गठबंधन नहीं होगा।’ उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी गठबंधन का अब किसी भी मायने में कोई अस्तित्व नहीं है। द्रविड़ पार्टी की प्रमुख पार्टी डीएमके ने कहा है कि वह अगले सप्ताह होने वाली विपक्षी बैठक में भाग नहीं लेगी ताकि अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान किया जा सके, जो कांग्रेस पार्टी के विश्वासघात से बहुत आहत हैं।