बिहार-एमपी के उपचुनाव में भाजपा की हार पर प्रियंका गांधी वाड्रा का तंज; क्या कहा?

बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन नतीजों से साफ है कि लोग अब भाजपा से तंग आ चुके हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की खाली पर कब्जा कर लिया। वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। जब संसद परिसर में पत्रकारों ने उपचुनाव के नतीजों पर प्रियंका गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने कहा, यह साफ है कि जनता भाजपा से थक चुकी है और तंग आ चुकी है। अब लोग समझ रहे हैं कि देश में क्या हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, यह तो सिर्फ शुरुआत है।
गुजरात में अपनी सीट बचाने में कामयाब रही भाजपा
वहीं, गुजरात के वडोदरा जिले की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने अपनी सीट बरकरार रखी। भाजपा उम्मीदवार सतीश गोविंदभाई पटेल ने कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों से हराया। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पहले नितिन नवीन के पास थी। उनके विधायक पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी संभालने के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 और राजद की रेखा कुमारी को 14,273 वोट मिले। लेकिन इस जीत के बीच सबसे ज्यादा चर्चा दो और उम्मीदवारों की हार की हो रही है। वजह यह है कि निर्दलीय उम्मीदवार नितीश कुमार और लालू प्रसाद यादव (ये बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि समान नाम वाले प्रत्याशी हैं) चुनाव मैदान में उतरे थे। दोनों को क्रमशः 149 और 81 वोट ही मिले, जिससे उनकी जमानत भी जब्त हो गई। नाम बड़े होने के कारण इन दोनों उम्मीदवारों की करारी हार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
दतिया में कांग्रेस की वापसी
वहीं, दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराकर सीट पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस को 66,757 (42.39%) वोट मिले, जबकि भाजपा 60,741 (38.57%) वोटों पर सिमट गई। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के वोटों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज हुई, जबकि आजाद समाज पार्टी ने तीसरे मोर्चे के रूप में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।



