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सुनेत्रा पवार ने बुलाई विधायकों की बैठक, पार्थ पवार के संगठन पर दबदबे की भी चर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर जारी असंतोष को दूर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने मंगलवार को विधायकों की बैठक बुलाई। इसका मकसद पार्टी में बढ़ती नाराजगी को संभालना और एकजुटता का संदेश देना था। इससे पहले सोमवार को उन्होंने नाराज वरिष्ठ नेताओं के साथ कोर कमेटी की बैठक की थी। पार्टी में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि पार्टी के कामकाज के तरीके और संगठन में फैसले लेने को लेकर कई नेता असंतुष्ट हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार संगठन पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सोमवार को हुई कोर कमेटी की बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद मंगलवार को पार्थ पवार और उनके छोटे भाई जय पवार ने वरिष्ठ नेताओं को भरोसा दिलाया कि संगठन से जुड़े फैसले लेने से पहले सभी संबंधित नेताओं से बेहतर तालमेल और सलाह-मशविरा किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास देवगिरी में हुई बैठक में पार्टी के 50 विधायकों में से 32 शामिल हुए। बैठक में कई विधायकों ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों पर चिंता जताई। उनका कहना था कि आपसी खींचतान की सार्वजनिक चर्चा से पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ विधायकों ने महायुति गठबंधन के अन्य घटक दलों, खासकर शिवसेना के मंत्रियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल रही है और पर्याप्त फंड भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इससे उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों से किए गए वादे पूरे करने में परेशानी हो रही है।

अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को अमित शाह से मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल जैसे नेता भी शामिल थे। खास बात यह रही कि इस मुलाकात में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार मौजूद नहीं थे। एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अमित शाह ने पार्टी में एकजुटता बनाए रखने में नाकामी पर नाराजगी जताई। उन्होंने संकेत दिया कि एनसीपी का कमजोर पड़ना सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। अब तक पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख सुनील तटकरे को ही कामकाज के नए तरीके से असंतुष्ट माना जा रहा था। लेकिन हालिया घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि नाराजगी अब दूसरे वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंच गई है।

सुनील तटकरे ने बैठक में गैरमौजूदगी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी
बैठक के बाद सुनील तटकरे ने बड़ी संख्या में विधायकों के अनुपस्थित रहने की बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि केवल तीन से चार विधायक बैठक में शामिल नहीं हो सके। उनके मुताबिक, बाकी विधायक, सांसद, वरिष्ठ नेता और मंत्री बैठक में मौजूद थे। हालांकि, तटकरे ने यह स्वीकार किया कि कुछ विधायकों ने विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि जब अजित पवार के पास वित्त मंत्रालय था, तब विधायकों को विकास कार्यों के लिए फंड मिलता था। पार्टी के भीतर असंतोष, संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवाल और विकास कार्यों के लिए फंड की कमी अब एनसीपी नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती बनते दिख रहे हैं।

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