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मां की सेहत का रखें ध्यान, ये उपाय उन्हें आर्थराइटिस-हड्डियों के दर्द से बचाने में करेंगे मदद

आज मदर्स डे है, यानी मां को सम्मान देने और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन। यह दिन हम अपनी मां का धन्यवाद करने, उन्हें प्यार करने और उनके त्याग को याद करने के लिए मनाते हैं। जिस तरह से दुनियाभर में कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में हमारे लिए मां के प्रति प्यार प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा तरीका है, उनकी सेहत का ख्याल रखना। कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनपर पहले से ही ध्यान दे दिया जाए और बचाव के लिए जरूरी उपाय कर लिए जाएं तो बड़े जोखिमों को टाला जा सकता है। भारतीय महिलाओं में जोड़ों में दर्द-हड्डियों की समस्या काफी आम है। हड्डियों से संबंधित दिक्कतें उनके लिए कई प्रकार की जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। विशेषकर 50 की उम्र के बाद अधिकतर महिलाएं इसका शिकार हो जाती हैं। डॉक्टर कहते हैं, सभी महिलाओं को कम उम्र से ही आर्थराइटिस से बचाव के लिए उपाय करना शुरू कर देना चाहिए। तो क्यों ने अपनी मां को इस समस्या से बचाने के लिए आज से ही कुछ उपाय शुरू कर दिए जाएं? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ होती लाइफस्टाइल ने कई प्रकार की समस्याओं को बढ़ा दिया है, आर्थराइटिस भी उनमें से एक है। इस समस्या के कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न की दिक्कत होने लगती है। यह शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हाथों, घुटनों, कूल्हों और पैरों में इसका जोखिम सबसे आम है। वैसे तो आर्थराइटिस की दिक्कत किसी को भी हो सकती है। हालांकि कई रिपोर्ट्स बताते हैं कि 50 की उम्र के बाद महिलाओं में आर्थराइटिस (गठिया) का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। इसके पीछे कई जैविक, हार्मोनल और जीवनशैली संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
महिलाओं में आर्थराइटिस के क्या कारण हैं?
डॉक्टर बताते हैं, महिलाओं में आर्थराइटिस के जोखिमों को बढ़ाने के लिए कई और कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के हड्डियों और जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ता है इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हड्डियों को कमजोर कर सकती है। हालांकि अच्छी बात ये है कि आप पहले से ही कुछ बातों का ध्यान रखकर आर्थराइटिस के जोखिमों को कम कर सकती हैं। आज से ही मां की सेहत को ठीक रखने और उन्हें जोड़ों की समस्याओं से बचाए रखने के लिए कुछ जरूरी उपाय शुरू कर दीजिए। सुनिश्चित करें कि मां के आहार में कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर चीजें दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां जरूर हों। ये हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी के बीज) और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स (हल्दी, लहसुन, अदरक) को भी मां के आहार में शामिल करें।  मां को नियमित व्यायाम के लिए ले जाएं। हल्की स्ट्रेचिंग और योग जैसे अभ्यास फायदेमंद हैं। वॉक करने की आदत बनाएं और अपने साथ वॉक पर ले जाएं, ये अभ्यास जोड़ों को लचीला बनाए रखने में मददगार है। वॉक करने और व्यायाम की मदद से वजन को भी कंट्रोल रखा जा सकता है। अधिक वजन होने से भी घुटनों पर दबाव बढ़ जाता है।
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नियमित हेल्थ चेकअप भी कराएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को नियमित रूप से हेल्थ चेकअप जरूर कराते रहना चाहिए। कुछ सामान्य से जांच भविष्य में होने वाली संभावित गंभीर बीमारियों से आपको बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं। 50 की उम्र के बाद मां को नियमित रूप से डॉक्टर के पास ले जाएं और कुछ जरूरी टेस्ट कराएं। इस उम्र में हार्मोनल असंतुलन का खतरा रहता है, इसलिए समय पर जांच होने और उसका इलाज कराने से किसी गंभीर समस्या से बचाव किया जा सकता है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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