कोरोना काल में ₹350 वाले बॉडी बैग ₹7000 में खरीदे? महाराष्ट्र के शिवसेना MP ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी सियासी गर्माहट के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के लोकसभा सांसद नरेश म्हस्के ने मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड महामारी के दौरान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में भारी भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है। ठाणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नरेश म्हस्के ने कहा कि जब वह महापौर थे, तब ठाणे नगर निगम ने कोविड में इस्तेमाल होने वाले बॉडी बैग (शवों को रखने के लिए थैला) 350 रुपये में खरीदे थे। लेकिन मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने वही बैग 7,000 रुपये में खरीदे। इस बात को लेकर म्हस्के ने सवाल उठाया कि इतना बड़ा फर्क क्यों?
संजय राउत पर साधा निशाना
शिवसेना सांसद ने आगे शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राउत ने स्वर्गीय आनंद दिघे का अपमान किया है, जो एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं और ठाणे में शिवसेना के बड़े नेता थे। साथ ही स्हस्के ने कहा कि संजय राउत और उनके साथी सत्ता के दरवाजे के बाहर खड़े हैं, जिनकी आज कोई राजनीतिक भूमिका नहीं बची है।
एकनाथ शिंदे को मिली राष्ट्रीय पहचान
सांसद म्हस्के ने आगे शिंदे गुट को राष्ट्रीय पहचान मिलने की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इस बात को समझाने के लिए म्हस्के ने उन्होंने उदाहरण दिया कि कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने हाल ही में केंद्र सरकार के ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत विदेशों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। म्हस्के ने आगे एमवीए सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि एमवीए सरकार के दौरान खिचड़ी घोटाला और पत्रा घोटाला भी हुए थे, जिनमें शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं की भूमिका रही। उन्होंने कहा कि जिनके ऊपर ऐसे गंभीर आरोप हैं, उन्हें एकनाथ शिंदे के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही म्हस्के ने दावा किया कि जब एकनाथ शिंदे शहरी विकास मंत्री थे, तब मुंबई की योजना से उन्हें जानबूझकर बाहर रखा गया था। यह एमवीए सरकार की नीति थी ताकि शिंदे की भूमिका कम की जा सके।



