वाणिज्य मंत्रालय ने बताया, चीन में दुर्लभ धातुओं के निर्यात आवेदनों को मंजूरी, देशों का खुलासा नहीं

चीन ने शनिवार को दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के लिए कुछ निर्यात लाइसेंस आवेदनों को मंजूरी दे दी है। इन धातुओं का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन और कई अन्य इलेक्ट्रानिक उद्योगों के निर्माण में किए जाते हैं। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे उद्योगों के लिए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेअर अर्थ मटेरियल) की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए यह मंजूरी दी गई है। हालांकि, अभी चीन की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि निर्यात लाइसेंस आवेदन की मंजूरी किन-किन देशों की दी गई है।
दो महीने पहले चीन से दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा था
बता दें कि चार अप्रैल को चीन ने दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीन के इस फैसले से दुनियाभर की ऑटो इंडस्ट्री में हाहाकार मच गया है। जापान में सुजुकी ने स्विफ्ट कार का प्रॉडक्शन रोक दिया है, तो भारत में भी कंपनियों के सामने मैन्युफैक्चरिंग रोकने की नौबत आ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार चीन ने यह फैसला अमेरिकी की ओर से लगाए गए टैरिफ के बाद लिया था। हालांकि, चीन का कहना है कि इन धातुओं का इस्तेमाल मिसाइल बनाने में भी किया जाता है इसलिए वह इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, दुर्लभ पृथ्वी धातुएं 17 तत्वों से मिलकर बनी धातुओं का एक समूह है।
61 प्रतिशत भंडार के साथ पूरी दुनिया में 90 फीसदी निर्यात का नियंत्रण चीन के पास
हालांकि ये कई देशों में मौजूद हैं, लेकिन इसकी खुदाई और प्रोसेसिंग बहुत महंगी है। इससे भारी मात्रा में प्रदूषण भी निकलता है। वर्तमान में दुलर्भ पृथ्वी धातुओं का 61 प्रतिशत भंडार चीन में है और पूरी दुनिया में 90 फीसदी निर्यात नियंत्रित करता है।



